टीम एबीएन, गुमला। कार्तिक उरांव कॉलेज गुमला में संपन्न दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जिसका विषय एथनो बॉटनी एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी एंड मल्टीडिसीप्लिनरी रिसर्च संपन्न हुआ। कई मायनों में यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अभूतपूर्व छाप छोड़ने के अलावा कई सीख के साथ अनेकों क्षेत्रीय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर जनमानस युवाओं, छात्र छात्राओं महिलाओं, वैध, जनजातीय समुदाय आदि समूहों को जागरूकता उत्पन्न कर गया।
सबसे पहले तो झारखंड के अत्यंत सुदूर जिले के कॉलेज में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय कांफें्रस का आयोजन ही एक कठिन कार्य प्रतीत हो रहा था। इसमें आयोजकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर न सिर्फ इस कॉलेज, बल्कि गुमला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया। आयोजन के प्रति बाहर से आए हुए वैज्ञानिकों, और मेहमानों की प्रशंसा भी बटोरी।
बताना होगा कि यहां कनाडा, श्रीलंका जैसे देशों के वैज्ञानिकों की भागीदारी रही। ही देश के नामचिन संस्थानों जैसे बोटनिकल सर्वे आफ इंडिया कोलकाता, सीएफटीआरआई मैसूर, नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ, नीरी नागपुर के वैज्ञानिकों ने अपनी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।
वहीं देश के 15 से अधिक राज्यों के लगभग 300 से अधिक प्रतिभागी युवा वैज्ञानिकों ने इस महा आयोजन में शिरकत किया। कॉन्फ्रेंस का आयोजन केओ कॉलेज गुमला के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल, सोसाइटी आॅफ इथनो बोटानिस्ट लखनऊ एवं सेंटर फॉर सोशल एंड एनवायरमेंटल रिसर्च रांची ने किया था।
मौके पर झारखंड और देश-विदेश के सामाजिक, शैक्षणिक, विज्ञान एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे। वैज्ञानिकों और समाजसेवियों को सम्मानित भी किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि राज्यपाल के शैक्षिक सलाहकार सह- महान शिक्षाविद् प्रो ई बाला गुरुसामी ने गुमला कॉलेज में इस आयोजन को बेहतरीन बताया।
रांची विश्वविद्यालय कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा ने इस महा आयोजन को कॉलेज और विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि बतायी। राज्यपाल के विशेष कार्य प्राधिकारी संजीव कुमार ने इसे बेहतर आयोजन के साथ-साथ मिल का पत्थर बताया।
नेशनल बोटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के डॉ मंजूषा श्रीवास्तव और डॉ अनिल कुमार गोयल ने आयोजन को सफल बताया और इस सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में आयोजन के लिए आयोजन समिति की प्रशंसा की। पहले दिन 29 नवंबर को 100 से ज्यादा शोधार्थी और वैज्ञानिकों ने चार तकनीकी सत्र में 100 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किया।
झारखंड और दूसरे राज्यों से आये हुए कलाकारों ने बेजोड़ सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए समां बांधा। प्रतिभागियों का मनोरंजन की किया। दूसरे दिन 30 नवंबर को भी तीन तकनीकी सत्र और दो ओरल सत्र में लगभग 40 शोध प्रश्न प्रस्तुत किया गया। एक पोस्टर सत्र में लगभग 20 पोस्टर प्रस्तुत किये गये।
समापन समारोह में कार्तिक उरांव की पुत्री और झारखंड की पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन पड़ाव नहीं होना चाहिए। इसे नयी शुरुआत की तरह देखा जाना चाहिए। यह बेहतर पहल है।
विशिष्ट अतिथि वन उत्पादकता संस्थान के निदेशक डॉ अमित पांडेय ने कहा कि आयोजन में तीन संस्थाओं को एक साथ मिलकर कार्य करना बेहतर प्रतीत होता है। वर्तमान दौर सहभागिता का है। किसी भी कार्य अथवा शोध के लिए सहभागिता और साझेदारी आवश्यक है। इस आयोजन में दिखाई दिया।
आयोजन समिति ने प्रतिभागियों के लिए ठहरने के लिए वन उत्पादकता संस्थान रांची, अराउस गुमला, सितारा गुमला, परिसदन गुमला, मत्स्य विद्यालय में ठहरने का इंतजाम किया था। सभी संस्थाओं को आयोजकों ने धन्यवाद दिया। इस आयोजन को सफल बनाने में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो एजे खालको के अलावा तमाम शिक्षकों, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत कुमार सिंहा और राजपाल भवन ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
अक्ष टेंट हाउस ने लाइट, टेंट और साउंड को बेहतर प्रबंधन किया वहीं कैटरर्स अतुल मुखर्जी ने प्रतिभागियों को स्वादिष्ट भोजन करवाया। जिसकी अतिथियों और वैज्ञानिकों में भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। इस अतंरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ प्रसन्नजीत मुखर्जी के बेहतर प्रबंधकीय कौशल की झलक इस आयोजन के दौरान दिखाई दिया।
उन्होंने अपने सहकर्मियों को सहयोग के लिए धन्यवाद और आभार। सभी प्रतिभागियों और मीडिया के साथियों को सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद दिया है। कुल मिलाकर यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन केओ कॉलेज गुमला के साथ गुमला के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुआ है।
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