एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक से सन्यास लेने की चल रही अटकलों पर रविवार को उस समय विराम लग गया जब कांग्रेस नेता अलका लांबा ने सोनिया गांधी की मौजूदगी में इसका खंडन किया। लांबा ने रायपुर में चल रहे कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने सम्बोधन में सोनिया के सन्यास लेने का खंडन करते हुए कहा कि मीडिया में इस आशय की खबरों के बाद उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात की।
जिस पर उन्होंने साफ कहा कि वह राजनीति से कतई पीछे नहीं हट रही हैं, वह पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करती रहेंगी। लांबा के इस कथन के समय सोनिया भी मौजूद थी। वह इस दौरान मुस्करा रही थी। दरअसल, सोनिया ने कल पूर्ण सत्र मे अपने सम्बोधन कहा था कि मुझे 1998 में पहली बार पार्टी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने का सम्मान मिला था।
इन 25 वर्षों में, हमारी पार्टी ने उच्च उपलब्धि के साथ-साथ गहरी निराशा का समय भी देखा है। 2004 और 2009 में हमारी जीत के साथ-साथ डॉ मनमोहन सिंह के सक्षम नेतृत्व ने मुझे व्यक्तिगत संतुष्टि दी, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि भारत जोड़ो यात्रा के साथ मेरी पारी का समापन हो सका। मीडिया के एक हलके में इस कथन को उनके राजनीति से सन्यास के संकेत के रूप में मानते हुए खबरें आयी थी। इससे आम कांग्रेसजनों में निराशा फैल गयी थी।
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