टीम एबीएन, कोडरमा। लोकप्रिय गायिका नेहा सिंह राठौड़ को उनके नये गीत यूपी में का बा पर नोटिस देकर कार्रवाई की चेतावनी दिये जाने की यूपी सरकार की निंदा करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया है। उन्होंने नेहा सिंह राठौड़ के साथ एकजुटता जताते हुए यूपी सरकार से नोटिस को तत्काल वापस लेने और इस शर्मनाक कृत्य के लिए माफी मांगने की भी मांग की है।
नेहा सिंह अपने गीतों के जरिए बेरोजगारी, महंगाई, उत्पीड़न सहित जनता के सवाल लगातार प्रमुखता से उठाती रही हैं। उन्होंने कानपुर की वीभत्स और दर्दनाक घटना जिसमें बुलडोजर और आग के चपेट में मां बेटी की जान चली गयी थी। जिस पर लोकगीत के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली नेहा सिंह राठौर को डराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस का उपयोग कर रही है, घटना पर "यूपी में का बा गीत का..." दूसरा संस्करण जारी किया था।
इस गीत में उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाया था। इस गीत पर कानपुर देहात पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस दिया है। नोटिस में नेहा सिंह राठौड़ को इस गीत के जरिये समाज में वैमनस्य और तनाव की स्थिति उत्पन्न करने का बेहुदा आरोप लगाया गया है।
माकपा यूपी सरकार की इस कार्रवाई को बोलने की आजादी पर हमला बताते हुए कहा है कि यूपी सरकार कानुपर देहात की घटना पर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने और अतिक्रमण के नाम पर गरीबों और सांप्रदायिक राजनीति के तहत गरीब परिवारों के घरों को अवैधानिक तरीके से गिराने की घटना पर रोक लगाने के बजाय इस पर सवाल उठाने वालों का मुंह बंद कराने का प्रयास कर रही है।
योगी सरकार जबसे सत्ता में आयी है तभी से पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दमन चला रही है। केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को झूठे मामले में फंसा कर दो वर्ष से अधिक समय तक जेल में रखा गया और जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई में बाधा खड़ी की गयी। बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक की खबर प्रकाशित करने पर बलिया के तीन पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया। वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन, सुप्रिया शर्मा पर केस दर्ज किया गया।
मिड डे मील में बच्चों को रोटी-नमक दिये जाने की खबर करने वाले पत्रकार पवन जायसवाल पर एफआईआर दर्ज की गयी। ऐसे अनगिनत घटनाएं हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की बुलडोजर नीति सवालों के घेरे में है। इसीलिए वह इस गीत को अपना विरोध मान रही है। गायिका नेहा सिंह राठौड़ को नोटिस जारी करना योगी सरकार की दमनकारी परियोजना का ही हिस्सा है।
लोकतंत्र में विरोध का सम्मान किए जाने की परंपरा है, किंतु ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने विरोध में कोई भी स्वर नहीं सुनना चाहती और ऐसी हर आवाज़ को दमन के रास्ते से दबा देना चाहती है। नेहा सिंह राठौर को दी गयी नोटिस भी इसी बात को प्रमाणित कर रही है। उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र के हर अंग पर डंडे चलाए जा रहे हैं। हम नेहा सिंह राठौड़ के साथ एकजुटता जाहिर करते हैं और लेखकों, पत्रकारों, प्रगतिशील लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व संगठनों से इसके खिलाफ प्रतिरोध दर्ज करने की अपील करते है। इस तरह की घोर अलोकतांत्रिक कार्यवाही को रोका जाना चाहिए।
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