टीम एबीएन, रांची। हेमंत सरकार को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, राज्यपाल रमेश बैस ने लोगों के अधिवास की स्थिति निर्धारित करने के लिए 1932 के भूमि रिकॉर्ड के इस्तेमाल के प्रस्ताव वाला विधेयक समीक्षा के लिए बीते रविवार को हेमंत सरकार को लौटा दिया है। राजभवन के एक बयान में यह जानकारी दी गयी।
यह संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों व निर्देशों के अनुसार होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा है कि यह संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों और निर्देशों के अनुसार होना चाहिए। कहा है कि सरकार इस विधेयक की वैधानिकता की गंभीरता से समीक्षा करे कि यह संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप हो। राज्यपाल ने लिखा है कि इस मामले में विधि विभाग ने भी सवाल उठाया था। विधेयक के प्रावधान सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट द्वारा पारित कई फैसलों के अनुरूप नहीं है।
राज्यपाल ने लिखा है कि एवीएस नरसिम्हा राव एवं अन्य बनाम आंध्र प्रदेश एवं अन्य (एआईआर 1970 सुप्रीम कोर्ट 422) में भी स्पष्ट व्याख्या की गई है कि नियोजन के मामले में किसी भी प्रकार की शर्तें लगाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। इस प्रकार यह विधेयक संविधान के प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत है।
गौरतलब है कि पिछले साल 11 नवंबर को विधानसभा के एक विशेष सत्र में झारखंड के स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा और ऐसे स्थानीय व्यक्तियों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य लाभों का विस्तार करने संबंधी विधेयक, 2022 को ध्वनि मत से पारित किया गया था। इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा गया था। साथ ही इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजने का अनुरोध किया था।
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