शानदार सफलता : एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण

 

एबीएन नॉलेज डेस्क (नयी दिल्ली)। भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और शानदार खबर है। भारत ने एक साथ अनेक सामरिक लक्ष्यों पर एक साथ निशाना लगाने वाली उन्नत अग्नि मिसाइल (एमआइआरवी-मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टागेर्टेबल री-एंट्री व्हीकल) का सफल उड़ान-परीक्षण किया है। भारत ने शनिवार को इसकी घोषणा की।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि यह परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह उड़ान-परीक्षण अनेक पेलोड के साथ किया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में स्थानिक रूप से फैले विभिन्न लक्ष्यों पर निर्देशित किया गया था। उड़ान संबंधी आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के दौरान मिशन के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक प्राप्त किये गये। यह मिसाइल एक ही समय में कई अलग-अलग टारगेट्स को भेदने में सक्षम है। इस महाविनाशक मिसाइल टेस्ट से दुनिया की नींद उड़ गयी। 

बांग्लादेश तक दिखा अद्भुत दृश्य 

परीक्षण के दौरान आकाश में चमकदार प्लूम (ग्लोइंग ट्रेल) पूर्वी भारत (ओडिशा, पश्चिम बंगाल) के साथ-साथ बांग्लादेश के तटीय इलाकों (जैसे सिताकुंडा, कॉक्स बाजार) से साफ दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोगों ने इसे आग की लकीर या अज्ञात उड़ान वस्तु बताया, जिससे विभिन्न कयास लगाए जाने लगे। 

कुछ ने इसे अग्नि-6 का परीक्षण माना।  यह क्षमता मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में बेहद प्रभावी है और भारत को परमाणु निरोधक क्षमता को मजबूत करती है। भारत इससे पहले मार्च 2024 में मिशन दिव्यास्त्र के तहत अग्नि-5 का एमआइआरवी परीक्षण कर चुका है, लेकिन यह नया टेस्ट और अधिक एडवांस सिस्टम की पुष्टि करता है। 

अग्नि-6 की मारक क्षमता 12,000 किमी  

यह मिसाइल देशभर के उद्योगों के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित की गयी है। यह परीक्षण भारत की रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

अग्नि सीरीज की मिसाइलें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के संदर्भ में निरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। एमआइआरवी और संभावित लंबी रेंज (5,000+ किमी या अधिक) के साथ यह मिसाइल एक साथ कई हमले की क्षमता प्रदान करती है। डीआरडीओ अध्यक्ष ने पहले ही अग्नि-6 कार्यक्रम की तकनीकी तैयारी की घोषणा की थी, जिसकी रेंज 10,000-12,000 किमी तक बताई जाती है। 

रक्षा क्षेत्र में बढ़ी अद्भुत क्षमता : राजनाथ  

सरकार की ओर से बताया गया कि मिसाइल के लॉन्च से लेकर सभी पेलोड्स के टारगेट से टकराने तक की पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी गयी। इसके लिए कई जमीनी और समुद्री (शिप-बेस्ड) ट्रैकिंग स्टेशनों का इस्तेमाल किया गया। 

फ्लाइट डेटा ने इस बात की भी पुष्टि कर दी है कि इस ट्रायल के सभी लक्ष्य सफल रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान-परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय सेना और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह बढ़ती हुई खतरे की धारणाओं के विरुद्ध देश की रक्षा तैयारियों में एक अद्भुत क्षमता जोड़ेगा।

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