त्रिदिवसीय विद्यापति पर्व समारोह प्रारम्भ

 

त्रिदिवसीय विद्यापति पर्व समारोह प्रारम्भ

टीम एबीएन, रांची। झारखंड मैथिली मंच राँची के सदस्यों ने  विद्यापति दलान हरमू से पैदल चलकर  मेन रोड पहुंच कर वहाँ पर अवस्थित महाकवि विद्यापति के मूर्ति पर सामूहिक रूप से माल्यार्पण किया।

तदुपरांत विद्यापति दलान पर साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम  तीन सत्र -उद्घाटन सत्र, साहित्यिक परिचर्चा एवं कवि गोष्ठी के रुप में हुआ।उद्घाटन सत्र का  शुभारंभ विद्या नाथ झा विदित, डा.परवेज हसन,प्रमोद कुमार झा, अतिथियों एवं मंच के अध्यक्ष बिनय कुमार झा महासचिव जयंत कुमार झा ,अरूण कुमार झा द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन  एवं विद्यापति के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ।

साथ ही पंडित शतीस कुमार मिश्र ने मंगल मंत्र स्वस्ति वाचन तथा शंख ध्वनि से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। पुनः मिथिला परंपरानुसार भगवती बंदना जय जय भैरवि असुर भयाउनि एवं राष्ट्रगान जन गण मन का सामूह गान हुआ। अतिथियों को पाग-दोपटा देकर स्वागत किया गया।

साथ ही अध्यक्ष बिनय कुमार झा ने अतिथियों उपस्थित समस्त लोगों का स्वागत किया। तदुपरांत उद्घाटनकर्ता डा.परवेज हसन ने मुख्य रूप से माता  जानकी के शक्ति, शौर्य, धैर्य, शहनशीलता, अनुशासन एवं मर्यादित जीवन की चर्चा करते हुए अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला।

साहित्यिक परिचर्चा में बोकारो से आयी शैलजा झा ने नारी शक्ति पर केंद्रित अनेक जानकारी दी। बोकारो से ही आए शंभूनाथ झा ने मैथिली नाट्य कला पर प्रकाश डाला। प्रमोद कुमार झा ने माता सीता के सर्वगुण संपन्नता का जिक्र करते हुए अनेक चारित्रिक चमत्कारिक जानकारी साझा की। डा.नरेन्द्र झा ने अनेक उद्धरणों द्वारा माता सीता के अनेक रूप का अविश्वसनीय परंतु सच्ची बातों का जिक्र किया।

हितनाथ झा ने कालिदास हमरे गामक छला मिथिला के उच्चैठ आ उज्जैन के एतिहासिक संबंध में एवं मैथिली भाषा साहित्य तथा  संस्कृति पर इतिहास पर आधारित ढ़ेरों  प्रामाणिक तथ्यों का जिक्र करते हुए श्रोताओं को विस्तृत जानकारी दी अंत में विद्या नाथ झा विदित ने मिथिलाक सामाजिक, सांस्कृतिक, वैश्विक गरिमाक आधारशिला जानकी विषय पर केन्द्रित अपने उद्वोधन में धरती पर विष्णु प्रिय महीना बैशाख में माता जानकी का प्राकट्य होना अपने आप में आध्यात्मिक तथ्यों को प्रमाणित करता है। 

विदेह राजा जनक की पुत्री के रूप में अवतरित होना महज संयोग नहीं अपितु अनेक पुराणों में बर्णित तथ्यों का अक्षरसः सत्यता को प्रतिपादित करता है। इसके साथ ही अनेकों प्रामाणिक तथ्यों का जिक्र करते हुए परिचर्चा को सार्थक कर दिया। त्रेतायुग में मिथिला भूमि पूण्य क्षेत्र के रूप में जाना जाता था ईसलिए ही माता जानकी ने अपने लिए मिथिला भूमि परज प्रकट हुई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आयीं डा.महुआ माजी ने अपने उद्वोधन में माता जानकी के शक्ति चरित्रों को स्मरण करते हुए कयी गूढ़ रहस्यों का जिक्र किया और कहा माता जानकी आज भी प्रासंगिक हैं अनुकरणीय हैं।आज युवती  बहनें उनके आदर्शों पर चलेंगी तो समाज बदल जाएगा।

उन्होंने बंगला एवं मैथिली भाषा एवं संस्कृति की समानता का जिक्र करते हुए बतायीं कि महाकवि विद्यापति का छाप गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर पर भी पड़ा है जो उनकी रचनाओं में साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जब जब राजनीति लड़खड़ाने लगती है तब तब साहित्यकार उन्हें थामने सामने आ जाते हैं।

मंच के संरक्षक अरूण कुमार झा के आग्रह पर साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी तथा संगीत एवं नाट्य कला अकादमी के गठन हेतु झारखंड सरकार से कैबिनेट में पारित हो चुका है। सुस्वादु भोजनोपरांत कवि गोष्ठी आरंभ हुआ जिसकी अध्यक्षता सिया राम झा सरस एवं मंच संचालन बदरीनाथ झा ने की। 

नन्द किशोर महतो ने अतिथियों का स्वगात किया। गोष्ठी की शुरुआत अंजू झा ने नारी समर्पण के प्रति मूर्ति एवं चुल्हा के हुई। युवा कवि प्रणव प्रियदर्शी ने गांव ओर शहर वास्तविक स्थिति को दर्शाते कविता प्रस्तुत कर बाहबाही लूट लिया। डा. आकांक्षा चौधरी नेनपन सीता के शिव के पिनाक उठौवति --मधु रानी ने एक सुंदर कबिता सुनाई। जयंती मिश्र ने कविता में जीवन दर्शन प्रस्तुति तथा आधुनिक वैश्विक स्थिति का सटीक चित्रण देखा गया एवं वसंत ऋतु का सुंदर वर्णन किया।

रेनू झा पति वियोग पर गेय गीत पूनम बर्मा  ने ककर दोष कविता इतिहास को दर्शाते सरोज झा झारखंडी ने कविता में  मिथिला दर्शन करा दिया।हिन्दी के जाने-माने कवि गीतकार कुमार विजयेंद्र ने गजल आसमानो पै सितारों के कयी ठिकाने निकले, हर सांस परेशान है लेकिन कभी कभी आंखों में आसमान है लेकिन कभी कभी--भोजपुरी कविता ओकरा अंखिया में सपना हिलोर मारेला --तबे सुगवा पिंजरवा प ठोर मारेला पटना चेतना समिति से पधारे उमेश मिश्र ने मैथिली हो जन जन की भाषा--आदि कविता मनमोह लिया। कविता झा ने आउ बैसू हमरा लग सुंदर कविता पाठ की।

रुणा रश्मि ने समसामयिक कविता युद्धक विभीषिका ने वैश्विक स्थिति का सटीक चित्रण जम्मू से आए राष्ट्रीय स्तर के कवि कमलेश भट्ट  ने गजल  सभी का प्यार पाना चाहती है -- मैं हिन्दू हूं मैं मुस्लिम हूं --सहित कुछ गजल प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। शैलजा झा ने स्त्री धन एवंथ विद्रोह करब स्वभाव नहि मधुबनी से आए महान कवि आनंद मोहन झा ने कहवाक लूरि चाही, सभ उंच नीच चेखि क कहवाक लूरि चाही --बेहाल जनता नेहाल सत्ता ई लोक तंत्रक हाल देखू  आत्मेश्वर झा हमर गाम कविता जैसे वर्तमान ग्रामीण परिवेश को जीवंत कर दिया।

दिवाकर झा ने चलू गाम मे घर बनाबी गांव में घर निर्माण की प्रक्रिया कविता में सराहनीय रहा। ककरो कनमा ककरो पौआ ककरो भेटय सेरक सेर आदि समसामयिक समस्या मूलक वर्तमान राजनीति पर चोट करती कविता से लोग बाग हो गये। कौशल किशोर झा ने सुंदर  कविता डा.कृष्ण मोहन झा गेय गीत माता सीता को समर्पित कविता से श्रोताओं का मन मोह लिया।

अध्यक्ष सिया राम झा सरस ने सरस गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।प्रेम चन्द्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
11एवं 12अप्रैल को हरमू मैदान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में समस्त समाज से सपरिवार भाग लेने का आग्रह  के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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