एबीएन सेंट्रल डेस्क। क्या जल्दी ही वह समय आने वाला है जब दिल्ली से लखनऊ तक का ट्रेन का सफर महज दो घंटे में तय होगा? या फिर दिल्ली से बेंगलुरु में भी इतना समय लगेगा। कुछ महानगरों के बीच की अभी चार-पांच घंटे की दूरी क्या महज 45 मिनट में तय हो जायेगी। सैद्धांतिक तौर पर इन सवालों का जवाब है हां, ऐसा हो सकता है और इस पर काम भी चल रहा है। लेकिन इस हां से पहले अनेक किंतु-परंतु हैं।
लंबी दूरी को ट्रेन के सफर से महज कुछ घंटों में तय करने को लेकर बहुत पहले से तैयारियां चल रही हैं। खासतौर पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल में जापान दौरे पर गये थे। तब कहा गया था कि भारत में भी बुलेट ट्रेन चलेंगी। जापान में बुलेट ट्रेन तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी चलती हैं। उसके बाद यहां कई रूटों को इसके लिए चिन्हित भी किया और तब से इस परियोजना पर काम चल रहा है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक मेड-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए 2024 में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को 2027 तक 250 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली दो बुलेट ट्रेन को विकसित करने का ठेका दिया था। हाल ही में मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को सूचित किया कि भारत में निर्मित पहली दो बुलेट ट्रेनें 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले रेल कॉरिडोर पर चलेंगी। इनका नाम बी28 है।
रेल कॉरिडोर का पहला चरण सूरत से वापी तक 97 किलोमीटर का खंड अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।
जापान इंटरनेशनल को-आॅपरेशन एजेंसी की वित्तीय सहायता से इस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें जापानी सिग्नलिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जापान में निर्मित 320 किमी/घंटा की गति वाली बुलेट ट्रेनें चलायी जायेंगी। अगर इस परियोजना को रफ्तार मिलेगी तो एक समय ऐसा भी आयेगा जब चंडीगढ़ से दिल्ली तक का सफर महज एक घंटे में पूरा कर लेंगे। हालांकि ऐसा होना अभी दूर की कौड़ी है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान रेलवे से जुड़े विभिन्न सवालों का जवाब दिया। इसी में उन्होंने बुलेट ट्रेन की प्रगति के बारे में भी बताया। बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति के बारे में वैष्णव ने कहा कि हमने इसके पहले सेक्शन को 2027 तक कमीशन करने का लक्ष्य रखा है।
बुलेट ट्रेन परियोजना पर विस्तार से जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अहमदाबाद से मुंबई प्रोजेक्ट की बहुत अच्छी प्रगति है। रेल मंत्री ने ने रेल लाइन बिछाए जाने से लेकर गार्डर और नदियों पर बने ब्रिज तक के आंकड़े बताये। रेल मंत्री ने साथ ही यह भी बताया कि कोलकाता मेट्रो की अंडर वाटर टनल की तर्ज पर पहली अंडर सी टनल बनायी जा रही है।
यहां गौर हो कि जल परिवहन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी अनेक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। अब बुलेट ट्रेन का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि पहली परियोजना पर काम चल रहा है। सब कुछ सामान्य रहा तो ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।
यहां गौर करने योग्य है कि इस बजट में सात नयी बुलेट ट्रेन का भी ऐलान किया गया।
रेल मंत्री के मुताबिक इन ट्रेन परियोजनाओं के पूरे होने पर बुलेट ट्रेन नेटवर्क करीब चार हजार किलोमीटर का हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ट्रेन के चलने से दिल्ली से वाराणसी साढ़े तीन घंटे, दिल्ली से लखनऊ दो घंटे में, वाराणसी से पटना एक घंटे से भी कम समय में पहुंच जायेंगे। यही नहीं, मुंबई से पुणे मात्र पौन घंटे में पहुंच जायेंगे। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पुणे से हैदराबाद दो घंटे की यात्रा रहेगी। हैदराबाद से बेंगलुरु दो घंटे, बेंगलुरु से चन्नई भी सवा घंटे की यात्रा रह जायेगी।
इस बीच, बुलेट ट्रेन को लेकर विशेषज्ञों ने रेल मंत्रालय को आगाह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रोटोटाइप परीक्षण बहुत जरूरी है। बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों के एक वर्ग ने मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले कॉरिडोर पर काम के समापन की सराहना करते हुए भी उत्पादन बढ़ाने के निर्णय पर आपत्ति जतायी है। एजेंसी की खबर के मुताबिक रेलवे बोर्ड के पूर्व इंजीनियरिंग सदस्य सुबोध जैन ने कहा, ह्यअगर आप भारत में लोकोमोटिव निर्माण के इतिहास पर नजर डालें, तो आप पाएंगे कि हमने पहले लोकोमोटिव आयात किये, फिर तकनीक को यहां स्थानांतरित कराया और अपना उत्पादन शुरू किया।
अब तक, हमने स्वदेशी रूप से 180 किमी प्रति घंटे की चलने की क्षमता वाले लोकोमोटिव विकसित किए हैं। इसलिए, 250 किमी प्रति घंटे की ट्रेन के लिए प्रोटोटाइप का व्यवहार्यता परीक्षण अनिवार्य है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का उत्पादन शुरू करने से पहले हमें 250 किमी प्रति घंटे या 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन का प्रूफ-आॅफ-कॉन्सेप्ट परीक्षण करना होगा। अब देखना होगा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कब और क्या रंग लाती है।
केंद्रीय रेल मंत्रालय ने पिछले दिनों संसदीय समिति के समक्ष कहा कि जापान निर्मित ट्रेनों को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों के कारण मंत्रालय ने पहले चरण में 250 किमी/घंटा की गति क्षमता वाली स्वदेशी ट्रेनों को विकसित करने का निर्णय लिया, जिसे बाद में 320 या 350 किमी/घंटा तक उन्नत किया जायेगा। अधिकारियों ने चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जापान ने अपने पहले के प्रस्ताव बी 5 शिंकानसेन ट्रेन के बजाय अधिक उन्नत बी 10 शिंकानसेन ट्रेन का प्रस्ताव रखा। बी5 का उत्पादन वर्तमान में जापान में बंद हो चुका है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse