एबीएन एडिटोरियल डेस्क। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए मनाया जाता है। यह पर्व शक्ति की उपासना का प्रतीक है और इसमें मां दुर्गा के नौ रूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
मां शैलपुत्री का स्वरूप चंद्रमा ग्रह से जुड़ा हुआ है। मां के इस रूप की पूजा कर मन को स्थिर करना सीखते हैं। मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप मंगल ग्रह से जुड़ा हुआ है। अनुशासन का हमारे जीवन में क्या महत्व है, मां हमें सिखलाती है। मंत्र: विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ।।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप शुक्र ग्रह से जुड़ा हुआ है। इस दिन खूब सुंदर से तैयार होकर पूजा के लिए बैठना चाहिए। मंत्र: दारिर्द्यदु:खभयहारिणी का त्वदन्या, सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता। इस दिन किये जाने वाले उपाय - हरसिंगार के पेड़ की पूजा करें। मां से त्रृण मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। पेड़ की जड़ अपने पास संभाल कर रखें। तीन गोमती चक्र लें। मिट्टी मे गड्डा करके इन्हें दबाना है। जिस जगह भी जातक खड़ा है, वहां के दक्षिण दिशा की ओर दबाना है। ऋण मुक्ति के लिए मां को याद करें। जिस चीज से गड्डा किए हैं , उसे भी वहीं छोड़ देना है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप सूर्य और गुरु ग्रह से जुड़ा हुआ है। पीले कपड़े धारण करके एकाग्रचित होकर मंत्र पाठ करना अच्छा रहता है। मंत्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:। चतुर्थी को किये जाने योग्य धनदायक उपाय- एक पान का पत्ता लीजिए उस पर गुलाब की पांच या सात पंखुड़ियां रखें और फिर मां दुर्गा को चढ़ायें। धन प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।
मां स्कंदमाता का स्वरूप बुध ग्रह से जुड़ा हुआ है। मां के पांचवें दिन किया जाने वाला उपाय- पंचमी तिथि के दिन पत्थर का एक छोटा सा टुकड़ा, थोड़ा सा दही और इत्र लेकर के बेलपत्र के पेड़ की पूजा करें। षष्ठी तिथि के दिन उसी बेलपत्र के पेड़ की छोटी-सी टहनी तोड़कर के घर लायें। मंत्र : सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
मां कात्यायनी का यह स्वरूप- जिन बच्चियों का विवाह नहीं हो रहा है और विवाह के लिए कोशिश की जा रही है वे नीचे दिए मंत्र का नियमित रूप से जाप करें। मंत्र: ॐ क्लीं कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे देहि नम:।।
मां कालरात्रि का स्वरूप आरोग्य प्रदान करता है। यह स्वरूप हमें मां काली और शनि से जोड़ता है। हमें अपने अंदर के अंधकार को दूर करना सिखाता है। मंत्र: जय त्वं देवी चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणी। जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
मां महागौरी का स्वरूप राहु और बुध ग्रह से जुड़ा हुआ है। इस दिन किया जाने वाला उपाय- सौ ग्राम धनिया चांदी या तांबे की कटोरी में डालकर मां के सामने रखें। मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ऊपर लिखे मंत्र का पाठ करके उन्हें सिद्ध कर अपने पास रखें। अगर किसी को डर लगता हो तो वह अपने पास में इस धनिया को रख सकता है। सोते समय अपने सिरहाने रख सकते हैं। घर के कोनों से नकारात्मकता दूर करने के लिए सिद्ध धनिया वहां डाल सकते हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठान में रख सकते हैं। घर में राहू का प्रभाव ज्यादा लगे तब धनिया के दानों की छोटी-छोटी पोटलियां बनाकर घर मे,अलमारियों में रखें।
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप केतू से जुड़ा हुआ है । यह हमें मोक्ष प्राप्ति की ओर ले जाता है। इस दिन किया जाने वाला उपाय- पीले कागज पर लाल रंग से अपनी इच्छा लिखें। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। इस मंत्र का जाप करें। जब तक इच्छा पूरी ना हो जाए तब तक नियमित रूप से मां के सामने एक दिया जला कर, इस कागज को सामने रखकर मंत्र पाठ करें। इच्छा पूरी होने पर कागज जल प्रवाह कर दें। जल प्रवाह करने मे दिक्कत हो तो मंदिर मे मां के सामने रख दें। सभी मंत्र और उपाय बड़े कारगर हैं। पर हम केवल एक दिया जला कर श्रद्धापूर्वक पूरे मन से कुछ वक्त मां के साथ एकाग्रचित हो कर बिताएं, तब भी मां हम भक्तों की सुनती है।
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