टीम एबीएन, रांची। स्वर्णिम कला कुंज मंच के द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हर नारी के मन की बात को अभिव्यक्त करने के लिए काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंच संस्थापिका डॉ रजनी शर्मा चंदा ने मंत्र उच्चारण एवं सरस्वती वंदना से किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ सुरेंद्र कौर नीलम ने किया।
मुख्य अतिथि डॉक्टर सुनील कुमार, रेनू झा रेणुका, पुष्पा सहाय गिन्नी, रेणु त्रिवेदी मिश्रा, श्वेता कुमारी आदि जुड़े। कार्यक्रम का संचालन रुचि पांडे ने किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष रूप से सभी ने अपने विचार व्यक्त किये। जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ सुरिन्दर कौर नीलम ने कहा कि नारी सृष्टि की जननी है, किन्तु पुरुष के योगदान के बिना संभव नहीं।
जितनी तेजी से नारियों की शिक्षा, हर क्षेत्र में उसकी उड़ान और विचारों ने प्रगति की है उसकी तुलना में पुरुषों की मानसिकता में धीरे-धीरे परिवर्तन हो रहा है। नारी को अपनी प्रगति के साथ आधुनिकता की मर्यादित परिभाषा समझनी होगी और पुरुषों को अपने घर से ही नारी सम्मान की शुरुआत करनी होगी। परिवार की एकता से ही समाज और देश की तरक्की संभव है। हृदय को नम करती रचना मत मारो आधी खिली बेटियाँ किस्मत से मिलती हैं बेटियाँ सुना कर सभी को सोचने पर बाध्य कर दिया।
श्वेता कुमारी ने सशक्त और गहरी बात को रचना प्रस्तुति में सुनाते हुए प्रश्न किया कि छोटी नन्हीं नाजुक फूलों को जब तुम मर्यादा का पाठ पढ़ाते हो बताओ जरा क्या तुम भी अपनी मर्यादा जान पाते हो? चिल्लाना, चिखना और डरना ये जो तुम हमें समझाते हो बताओ जरा उसके दिल को भी समझ पाते हो?
पुष्पा सहाय गिन्नी ने नारी मन की बात को बहुत ही बेहतरीन तरीके से कहा कुछ ज्वलंत प्रश्नों को उन्होंने सहजता से पूछा कि कहाँ... कब... होगी भोर, हृदय मचाता रहता शोर, कहने को स्वतंत्र है नारी, लेकिन अपने ही घर में परतंत्र है नारी। रेणु मिश्रा ने सुमधुर स्वर में गजल से अपने जज्बातों को बयां किया एहसासात की एक कहानी है औरत, रूका हुआ आँखों में पानी है औरत, अपनी हस्ती औरों पे कुर्बान करे..इतनी अफ़ज़ल, इतनी दानी है औरत।
वहीं कार्यक्रम का शानदार संचालन करते हुए रुचि पांडेय ने मधुर गीत में मन के भावों को दर्शाया तुमने ही सम्मान दिया है, तुमने ही अपमान दिया कभी दिया देवी का दर्ज़ा, कभी अलग बखान दिया, मिशाल हमें महान दिया, तुमने अपना मकान दिया। हे पुरुष! ये भूल ना जाना, हमने तुमको प्राण दिया। रेनू झा रेणुका ने नारी सशक्तिकरण को नए अंदाज में पेश किया हे नारी लिबास सम्मान तेरा, सभी की नजरों में मान तेरा, ना छोड़ यूं मर्यादा, तुझसे, धर्म, सृजन है।
डॉ सुनील कुमार ने सभी महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जीवन से जुड़ी हर नारी का सम्मान करना चाहिए।मनुस्मृति में लिखा है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। अंत में कार्यक्रम संयोजिका डॉ रजनी शर्मा ने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि स्त्री पुरुष एक ही सिक्के के दो पहलू हैं समाज में महिलाओं के बढ़ने से समाज का सर्वाधिक विकास संभव है।
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