टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि वीर बाल दिवस प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस सिख इतिहास के उन अमर बाल वीरों-साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह-की शहादत की स्मृति में समर्पित है, जिन्होंने धर्म, सत्य और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अत्यंत कम आयु में अद्वितीय साहस का परिचय दिया।
भारत सरकार ने वर्ष 2022 में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि देश की युवा पीढ़ी इन प्रेरक आदर्शों से परिचित हो सके।साहिबजादे जोरावर सिंह (आयु लगभग 9 वर्ष) और फतेह सिंह (आयु लगभग 6 वर्ष) सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्र थे। सन् 1705 में कठिन परिस्थितियों के बीच वे अपने परिवार से बिछुड़ गये और अंतत: उन्हें सरहिंद में बंदी बनाया गया।
उनसे अपने धर्म और सिद्धांतों से विचलित होने का दबाव डाला गया, किंतु बाल साहिबजादों ने सत्य और आस्था से समझौता करने से इंकार कर दिया। उनके इसी अडिग साहस और बलिदान की स्मृति में वीर बाल दिवस मनाया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग, संगठन और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर समानता, साहस और सेवा के मूल्यों को सुदृढ़ किया साहिब जादे इन्हीं आदर्शों में पले-बढ़े।
अत्यंत कम आयु होने के बावजूद उनमें अदम्य, आत्मबल, नैतिक दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि उम्र नहीं, बल्कि चरित्र और विश्वास ही सच्ची शक्ति होते हैं।वीर बाल दिवस केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा है। यह दिवस बच्चों और युवाओं में नैतिक साहस, धार्मिक सहिष्णुता, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रप्रेम के भाव को जाग्रत करता है।
यह हमें बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग चुनना ही सच्ची वीरता है। विद्यालयों, सामाजिक संस्थानों और समुदायों में इस दिन संगोष्ठियां, भाषण, निबंध प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर इन मूल्यों को आगे बढ़ाया जाता है। आज जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, वीर बाल दिवस हमें ईमानदारी, साहस और मानवीय मूल्यों की रक्षा का संकल्प दिलाता है।
साहिबजादों का जीवन यह सिखाता है कि अन्याय के सामने झुकना नहीं, बल्कि शांत दृढ़ता के साथ सत्य पर अडिग रहना ही वास्तविक विजय है। वीर बाल दिवस भारत की सांस्कृतिक और नैतिक विरासत का उज्ज्वल अध्याय है। यह दिवस हमें उन बाल वीरों को नमन करने का अवसर देता है, जिनका बलिदान सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा। उनके आदर्शों को अपनाकर ही हम एक न्यायपूर्ण, साहसी और संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।
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