सरना समाज पर दूरगामी परिणामों पर चिंतन जरूरी : जगदीप भगत

 

व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा, आरोप-प्रत्यारोप और सरना समाज पर उसका प्रभाव या दुष्प्रभाव : दूरगामी परिणामों पर गहन चिंतन आवश्यक : जगदीप भगत  

एबीएन, न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को चुनाव लड़ने और राजनीति में भाग लेने का अधिकार है। यह अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन जब राजनीति का उद्देश्य समाज सेवा, समुदाय की एकता और जनहित के बजाय केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, पद प्राप्ति या राजनीतिक पहचान बनाना रह जाता है, तब उसके नकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ने लगते हैं। विशेष रूप से सरना समाज जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील समुदायों को इसका अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

आज कई बार देखा जाता है कि कुछ लोग चुनावी लाभ, लोकप्रियता या वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसे बयान दे देते हैं जिनके दूरगामी परिणामों पर पर्याप्त विचार नहीं किया जाता। सार्वजनिक जीवन में बोले गये शब्द केवल व्यक्तिगत विचार नहीं रह जाते, बल्कि वे समाज के भीतर भ्रम, मतभेद और विभाजन का कारण भी बन सकते हैं। 

यदि कोई व्यक्ति बिना तथ्यों की जांच किए, बिना सामाजिक प्रभावों को समझे या बिना समुदाय के व्यापक हितों को ध्यान में रखे बयान देता है, तो उसका असर आने वाले वर्षों तक दिखाई दे सकता है। सरना समाज की पहचान उसकी परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं, सामुदायिक एकता और पूर्वजों से प्राप्त सांस्कृतिक विरासत में निहित है। 

ऐसे में यदि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण समाज को विभिन्न गुटों में बांटने, एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने या सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया जाता है, तो इससे समाज की सामूहिक शक्ति कमजोर होती है। समाज की ऊर्जा अपने अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा में लगने के बजाय आंतरिक विवादों में खर्च होने लगती है। 

किसी भी समाज का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता या राजनीतिक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल वर्तमान की राजनीति तक सीमित नहीं होती। उनके शब्द और निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उदाहरण बनते हैं। इसलिए किसी भी विषय पर बोलने से पहले उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक परिणामों का गंभीरता से मूल्यांकन करना आवश्यक है। 

एक असावधान बयान या निर्णय समाज में अविश्वास, भ्रम और अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकता है। सरना समाज को आज एकता, जागरूकता और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं तब तक उचित हैं जब तक वे समाज के हितों के साथ जुड़ी हों। लेकिन यदि व्यक्तिगत लाभ को समाज के सामूहिक हित से ऊपर रखा जाता है, तो इसका नुकसान पूरे समुदाय को उठाना पड़ता है।

इसलिए आवश्यक है कि समाज के सभी जिम्मेदार व्यक्ति, चाहे वे राजनीतिक क्षेत्र में हों या सामाजिक क्षेत्र में, अपने विचारों और कार्यों में संयम, जिम्मेदारी और दूरदर्शिता का परिचय दें। समाज का हित, एकता और सांस्कृतिक अस्तित्व किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा से बड़ा होता है। इसलिए हर निर्णय और हर वक्तव्य समाज के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर ही दिया जाना चाहिए।

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