7 साल की कानूनी लड़ाई के बाद डॉ मनोज कच्छप बने असिस्टेंट प्रोफेसर

 

  • 7 साल की कानूनी लड़ाई के बाद डॉ मनोज कच्छप बने असिस्टेंट प्रोफेसर
  • हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी पीजी विभाग में मिली नियुक्ति

टीम एबीएन, रांची। सात वर्षों तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद नागपुरी विषय के अभ्यर्थी डॉ। मनोज कच्छप को आखिरकार न्याय मिल गया। सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कर दी गई है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।

2018 में जारी हुआ था विज्ञापन

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने वर्ष 2018 में बैकलॉग और नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस प्रक्रिया में नागपुरी विषय के अभ्यर्थी डॉ मनोज कच्छप ने भी आवेदन किया था। फरवरी 2020 में आयोग द्वारा जारी एकेडेमिक अंक में डॉ. कच्छप को अपने विषय में 85 में से 72.10 अंक मिले, जो नागपुरी विषय में सबसे अधिक थे।

साक्षात्कार सूची में नहीं था नाम

उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के बावजूद 23 नवंबर 2021 को जारी साक्षात्कार सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। जबकि वे गोल्ड मेडलिस्ट, नेट-जेआरएफ योग्यताधारी और शिक्षण अनुभव वाले अभ्यर्थी हैं। न्याय की मांग को लेकर उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अदालत के हस्तक्षेप के बाद उनका नाम साक्षात्कार सूची में जोड़ा गया।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

मामले की सुनवाई के बाद 6 मार्च 2024 को झारखंड हाईकोर्ट ने डॉ. कच्छप के पक्ष में फैसला सुनाते हुए चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति देने का आदेश दिया। इसके बाद भी जेपीएससी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट की डबल बेंच में ले गया। डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए आयोग पर एक लाख रुपये का जुमार्ना लगाया और दो सप्ताह के भीतर जॉइनिंग कराने का निर्देश दिया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 24 नवंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अभ्यर्थी के पक्ष में निर्णय सुनाया।

रांची विश्वविद्यालय में मिली नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जेपीएससी ने परिणाम अधिसूचित किया और डॉ. मनोज कच्छप की नियुक्ति रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी पीजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कर दी गयी।

विभाग को मिलेगी नई ऊर्जा

फिलहाल नागपुरी पीजी विभाग में केवल एक स्थायी सहायक प्राध्यापक डॉ. उमेशनंद तिवारी, जो विभागाध्यक्ष भी हैं, कार्यरत हैं। इसके अलावा दो नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बीरेंद्र कुमार महतो और डॉ. रिझू नायक कार्य कर रहे हैं।

विभाग में पीजी छात्रों के साथ लगभग 40 शोधार्थी शोध कार्य कर रहे हैं। ऐसे में डॉ. मनोज कच्छप जैसे योग्य और संघर्षशील असिस्टेंट प्रोफेसर के आने से विभाग में शिक्षण और शोध कार्य को नयी गति मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है। मौके पर विभाग के सहायक प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्रों ने डॉ. मनोज कच्छप को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। इनके ज्वाइनिंग से सभी लोग काफी खुश हुए।

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