2026 में कैसी रहेगी बाजार की चाल

 

निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर? मोतीलाल ओसवाल ने दिया न्यू ईयर आउटलुक 

बजट 2026 को खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे एफवाई 27 की दिशा तय हो सकती है।

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय शेयर बाजार की चाल 2026 में स्थिर रहने और इसमें धीरे-धीरे तेजी आने की उम्मीद है। जबकि साल 2025 में भारतीय बाजार डबल डिजिट की ग्रोथ तक पहुंचने में कामयाब रहे। बेंचमार्क इंडेक्स एनएसई निफ्टी करीब 10% की सालाना बढ़त के साथ आॅल-टाइम हाई के आसपास रहा। 

2025 में बाजार ने कंसॉलिडेशन का दौर देखा, लेकिन 2026 में कॉरपोरेट कमाई में सुधार, निजी निवेश में धीरे-धीरे बढ़त, और सरकारी नीतियों के समर्थन से बाजार को सहारा मिल सकता है। बजट 2026 को खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे एफवाई 27 की दिशा तय हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने नये साल के आउटलुक में यह बात कही है। 

2026 में निवेशक क्या करें? 

मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए ज्यादा सकारात्मक साल हो सकता है। कमाई में सुधार, नीतिगत समर्थन, और निवेशकों का भरोसा बाजार को सहारा देगा। निवेशकों को सलाह है कि अनुशासन बनाये रखें, मजबूत कंपनियों पर फोकस करें, और बाजार की अस्थिरता को मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश का मौका समझें। 

ब्रोकरेज का कहना है कि भारत की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी बरकरार है। युवा आबादी, डिजिटल अपनाने में तेजी, घरेलू बचत का फाइनैंशल एसेट्स की ओर जाना और लगातार सुधार से इसे बूस्ट मिल रहा है। अगर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद का समाधान होता है, तो यह बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत होगा। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैल्यूएशन के लिहाज से निफ्टी-50 का फॉरवर्ड पी-ई करीब 21.5 गुना है, जो इसके लंबे औसत से थोड़ा ही ऊपर है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अब भी महंगे नजर आ रहे हैं। निफ्टी मिडकैप-100 और स्मॉलकैप-100 अपने लंबे औसत के मुकाबले काफी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। इसलिए ब्रोकरेज का कहना है कि मिड और स्मॉलकैप में चुनिंदा और मजबूत कंपनियों पर ही फोकस करना चाहिए। 

निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर 

ब्रोकरेज ने लार्जकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है, खासकर उन सेक्टरों में जहां कमाई मजबूत है। इनमें फाइनैंशियल सेक्टर, कंजम्शन से जुड़े सेक्टर, इंडस्ट्रियल एंड कैपिटल गुड्स, आईटी सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा शामिल हैं। 

ब्रोकरेज का कहना है कि फाइनैंशल सेक्टर की बात करें तो मजबूत क्रेडिट ग्रोथ है। रिटर्न रेशियो अच्छा और मजबूत बैलेंस शीट है। कंजम्प्शन में कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी दमदार है। आॅटोमोबाइल मांग में सुधार से फायदा उठा सकते हैं। इंडस्ट्रियल्स और कैपिटल गुड्स देखें तो इसे इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी ट्रांजिशन से मजबूती मिल रही है। 

आईटी सर्विसेज मीडियम टर्म में सकारात्मक, क्योंकि वैश्विक टेक खर्च में सुधार देखने को मिला है और आगे अक व डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ेगा। वहीं, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर डिफेंसिव ग्रोथ और पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं। 

2025 बाजार के लिए री-सेट का साल 

2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव और री-सेट का साल रहा। अमेरिका के टैरिफ, ऋकक की बिकवाली, रुपये में कमजोरी, और वैश्विक तनाव ने बाजार पर दबाव बनाये रखा। हालांकि साल के अंत में निफ्टी ने वापसी की और 1 दिसंबर 2025 को 26,325 का रिकॉर्ड स्तर छू लिया। मिडकैप ने सीमित बढ़त दिखायी, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। 

1. आरबीआई का रहा अहम रोल 

2025 में फइक ने चार बार ब्याज दरें घटायीं, कुल 125 बेसिस पॉइंट (1.25%) की कटौती की गयी। रीपो रेट घटकर 5.25 फीसदी पर आ गयी। ब्याज दरों में कटौती के अलावा, आरबीआई ने बाजार में नकदी बढ़ाने पर भी जोर दिया। जून 2025 में कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में 1 फीसदी की कटौती का ऐलान किया गया, जिसे चार चरणों में लागू किया गया। इससे बैंकिंग सिस्टम में करीब 2.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी आयी। 

इसके साथ ही, आरबीआई ने ओपन मार्केट आपरेशन (ओएमओ) के जरिए भी बाजार में पैसा डाला। दिसंबर 2025 में आरबीआई ने 1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड खरीदे, ताकि सिस्टम में लंबे समय तक पर्याप्त नकदी बनी रहे। 

2. मजबूत बनी रही इकॉनमी 

साल 2025 में भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रही। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (क्यू2) में देश की जीडीपी 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी, जिसकी मुख्य वजह कंजम्प्शन में तेजी रहा। नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई (सीपीआई) घटकर 0.71 फीसदी पर आ गयी, जो रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी नीचे है। इसकी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम कम होना और जीएसटी में सुधार रहा। 

इस दौरान भारतीय रुपया कभी-कभी कमजोर जरूर हुआ, लेकिन डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद आरबीआई के समय पर किए गए कदमों से रुपये को सहारा मिला। साल के दौरान सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में भी बदलाव आया। सरकार ने बड़े कैपेक्स के साथ-साथ अब खपत बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। आयकर में छूट, जीएसटी में बड़े बदलाव और 8वें वेतन आयोग को लागू करने की प्रस्तावित योजना का मकसद घरेलू मांग को बढ़ाना और लोगों के खर्च को प्रोत्साहित करना है। 

जीएसटी सुधारों के तहत पहले की चार दरों की व्यवस्था को आसान बनाकर दो स्लैब (5 फीसदी और 18 फीसदी) में बदला गया है। इसके अलावा कुछ चुनिंदा लग्जरी और सिन प्रोडक्ट्स पर 40 फीसदी की ऊंची दर रखी गयी है। इससे टैक्स व्यवस्था आसान हुई, नियमों का पालन बेहतर हुआ और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उपभोग का भरोसा मजबूत हुआ। 

3. अर्निंग्स रही कमजोर 

अर्निंग्स के मोर्चे पर देखें तो निफ्टी-50 में सुस्त ग्रोथ देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (क्यू2) में कंपनियों का मुनाफा (पीएटी) साल-दर-साल सिर्फ 2 फीसदी बढ़ा। यह लगातार छठी तिमाही रही, जब कमाई में कमजोर बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस दौर को कमाई से ज्यादा वैल्यूएशन के आधार पर बाजार के ठहराव (कंसोलिडेशन) का समय माना गया। 

हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में कमजोर नतीजों की चिंता बनी रही, लेकिन दूसरी छमाही में कई सेक्टरों में सुधार के संकेत मिले। आयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसीएस), टेलीकॉम, मेटल्स, टेक्नोलॉजी, एनबीएफसी (लोन कारोबार), सीमेंट और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टरों में बेहतर प्रदर्शन दिखा। इसी वजह से निफ्टी की अर्निंग प्रति शेयर (ईपीएस) के अनुमान वित्त वर्ष 2026 के लिए 1.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2027 के लिए 0.5 फीसदी बढ़ाये गये, जिससे आगे कमाई में सुधार की उम्मीद बनी है। 

4. डीआईआई ने दिखाया दम 

2025 में एक अहम बदलाव यह रहा कि डीआईआई (घरेलू निवेशक) की हिस्सेदारी पहली बार डीआईआई (विदेशी निवेशक) से ज्यादा हो गयी। मजबूत घरेलू निवेश और प्राइमरी मार्केट में तेज गतिविधियों की वजह से मार्च 2025 में पहली बार निफ्टी-500 कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी एफआईआई से ज्यादा हो गयी। सितंबर 2025 तक यह रुझान और मजबूत हुआ। इसके विपरीत, विदेशी निवेशक पूरे साल ज्यादातर बिकवाल बने रहे। 20 दिसंबर 2025 तक उनकी कुल बिकवाली करीब 2.31 लाख करोड़ रुपये रही। 

एफआईआई की बिकवाली की वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ना, डॉलर मजबूत होना और कैपिटल का रुख उन बाजारों की ओर जाना रहा, जहां अक और सेमीकंडक्टर से जुड़ी ग्रोथ दिख रही है, जैसे चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया। भारत में भी आई और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में कमजोर कमाई ने विदेशी निवेश को प्रभावित किया। 

हालांकि, साल के आखिर में बिकवाली का दबाव कुछ कम हुआ और दिसंबर 2025 में कई दिनों तक ऋकक नेट खरीदार भी बने। कुल मिलाकर, साल 2025 बाजार के लिए उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं से भरा रहा, लेकिन इसने वैल्यूएशन और निवेशकों की उम्मीदों को संतुलित करने में मदद की।

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