एबीएन सेंट्रल डेस्क। आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक देशव्यापी जागरूकता और सुगमीकरण पहल है जो नागरिकों को बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और वापस पाने में मदद करती है। यह पहल विनियमित वित्तीय प्रणालियों में बैंकों, बीमा, म्यूचुअल फंड, डिविडेंड, शेयरों और सेवानिवृत्ति लाभों में बिना दावे वाली बचत पर ध्यान देती है।
वित्तीय सेक्टर विनियामक के साथ वित्तीय सेवा विभाग द्वारा समन्वित, यह अभियान डिजिटल पोर्टल को जिला-स्तरीय सुविधाओं के साथ जोड़ता है। सरकारी विभागों, विनियामकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वित प्रयासों से, लगभग 2,000 करोड़ रुपये सही मालिकों को लौटाये जा चुके हैं।
पीढ़ियों से, भारतीय परिवार बैंक खाता खोलकर, बीमा पॉलिसी खरीदकर, म्यूचुअल फंड में निवेश करके, शेयर से लाभांश कमाकर और सेवानिवृत्ति के लिए पैसे अलग रखकर ध्यान से बचत करते आए हैं। ये वित्तीय निर्णय अक्सर बच्चों की पढ़ाई में सहायता करने, स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओें को पूरा करने और वृद्धावस्था में सम्मान का जीवन सुनिश्चित करने के लिए उम्मीद और जिÞम्मेदारी के साथ लिये जाते हैं।
फिर भी, पिछले कुछ समय से मेहनत से कमाई गई इन बचत के एक बड़े हिस्से पर कोई दावा नहीं किया गया है। यह धन न तो विलुप्त हुआ है, न ही इसका गलत इस्तेमाल हुआ है। यह विनियमित वित्तीय संस्थानों के पास सुरक्षित है, जो जानकारी की कमी, पुराने रिकॉर्ड, रहने की जगह में बदलाव या खोए दस्तावेजों की वजह से अपने असली हकदारों से अलग हो गया है। कई मामलों में, परिवारों को पता ही नहीं होता कि ऐसी परिसंपत्तियां विद्यमान हैं।
आपकी पूंजी, आपका अधिकार, नागरिकों को इन भूली वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ने और यह सुनिश्चत करने की एक देशव्यापी कोशिश है कि जो धन लोगों और परिवारों का है, वह आखिर में उनके पास वापस आ जाये।
बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों का निर्माण तब होता है जब वित्तीय संस्थानों के पास रखे पैसे पर खाता धारक या उनके कानूनी वारिस लंबे समय तक दावा नहीं करते। ऐसी परिसंपत्तियों में शामिल हैं :
इस चुनौती का एक संरचित और नागरिक-केंद्रित तरीके से समाधान करने के लिए, सरकार ने अक्टूबर 2025 में एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता और सुविधा अभियान के रूप में आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल आरंभ की। इस पहल को वित्तीय सेक्टर के प्रमुख फंड विनियामकों के सहयोग से वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा समन्वित किया गया है, जिसमें शामिल हैं :
इसका मुख्य लक्ष्य सरल प्रकियाओं और पारदर्शी प्रणालियों का उपयोग कर उन नागरिकों की पहचान करने, एक्सेस प्रदान करने तथा बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियां प्राप्त करने में उनकी मदद करना है जो कानूनी रूप से उनके हैं।
भारत में बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों की संख्या बहुत अधिक है और यह औपचारिक वित्तीय प्रणाली के कई हिस्सों में फैली हुई है। एक मोटे अनुमान के अनुसार, भारतीय बैंकों के पास कुल मिलाकर लगभग 78,000 करोड़ रुपए के बिना दावे वाले डिपॉजिट हैं। बिना दावे वाली बीमा राशि पॉलिसी से मिलने वाली राशि के लगभग 14,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि म्यूचुअल फंड में बिना दावे वाली रकम लगभग 3,000 करोड़ रुपये है।
इसके अतिरिक्त, बिना दावे वाले डिविडेंड लगभग 9,000 करोड़ रुपये के हैं। कुल मिलाकर, यह धन राशि नागरिकों की उन बिना दावे वाली बचत की मात्रा को रेखांकित करती है जो वित्तीय प्रणाली में सुरक्षित होने के बावजूद उपयोग में नहीं लायी जा रही है।
बिना दावे वाला धन केवल एक वित्तीय संख्या नहीं है। परिवारों के लिए, इसका दुष्परिणाम यह हो सकता है कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका सहायता या आपातकालीन स्थितियों के लिए आवश्यक फंड सीमित मात्रा में या देर से प्राप्त हो। वरिष्ठ नागरिकों के लिए, इसमें पेंशन या बीमा के लाभ शामिल हो सकते हैं जो आवश्यक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं।
प्रणालीगत स्तर पर बिना दावे वाली परिसंपत्तियां नागरिकों और औपचारिक वित्तीय प्रणाली के बीच संपर्क को कमजोर करती हैं। जब लोग उन धन को प्राप्त करने में विफल रहते हैं जो उनके अपने हैं तो इससे भरोसे, भागीदारी और विश्वास पर असर पड़ता है। आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल के साथ इस मुद्दे को हल करने से न केवल घरेलू वित्त सुदृढ़ होगा, बल्कि वित्तीय संस्थानों की साख और समावेशिता भी मजबूत होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित यूडीजीएएम पोर्टल एक केंद्रीकृत तरीके से सभी सहभागी बैंकों में बिना दावे वाली बैंक जमाराशियों के लिए केंद्रीय खोज की सुविधा प्रदान करता है। जब संबंधित बैंक दावे का निपटान करते हैं, तो यह पोर्टल नागरिकों की पहचान करने में मदद करता है कि बिना दावे वाली शेष राशि कहां मौजूद हैं।
अगर बैंक में जमा राशि (डिपॉजिट) पर दस साल या उससे ज्यादा समय तक कोई दावा नहीं करता है, तो उसे डिपॉजिÞटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईए फंड) में हस्तांतरित कर दिया जाता है। हालांकि, वो राशि तब भी कस्टमर का ही रहता है, और कस्टमर या उनके कानूनी वारिस कभी भी इस राशि के लिए दावा कर सकते हैं, इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं है।
बीमा भरोसा पोर्टल लोगों को बिना क्लेम की गई बीमा पॉलिसी की रकम का पता लगाने में मदद करता है। इसमें पॉलिसीधारक, नॉमिनी और उनके कानूनी वारिसों को बीमा कंपनियों के इंक्वायरी पेज के लिंक मिल जाते है जहां वो यह चेक कर सकते हैं कि उन्हें कोई बीमा राशि मिलनी है या नहीं।
बीमा की रकम तब अनक्लेम्ड मानी जाती है जब ड्यू डेट से बारह महीने के बाद भी उसका भुगतान नहीं हुआ होता है।
बीमा की रकम जो दस साल से ज्यादा समय तक अनक्लेम्ड रहती है, उसे सरकार द्वारा मेंटेन किए जाने वाले सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर फंड (एससीडब्ल्यूएफ) में हस्तांतरित कर दिया जाता है। इस तरह के हस्तांतरण से बीमा रकम के मालिकाना अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता है, और लाभार्थी के पास हस्तांतरण की तारीख से 25 साल तक रकम पर दावा करने का अधिकार बना रहता है।
पॉलिसीधारक, नॉमिनी या कानूनी वारिस, एससीडब्ल्यूएफ में बीमा रकम हस्तांतरित होने के बाद भी, तय प्रक्रिया के हिसाब से दावा शुरू करने के लिए संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं। बीमा की दावा रहित रकम पर दावा करने के लिए किसी तरह का कोई शुल्क नहीं है।
यह व्यवस्था बचाव के उपायों को भी बढ़ावा देता है, जिसमें कॉन्टैक्ट विवरण को अद्यतन करना, नॉमिनेशन रजिस्टर और अपडेट करना, परिवार के सदस्यों को बीमा पॉलिसी के बारे में बताना, और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पॉलिसी दस्तावेज का फिजिकल या डिजिटल रिकॉर्ड रखना शामिल है। आसान पहचान के लिए पॉलिसी को आधार और पैन से भी लिंक किया जा सकता है।
एमएफ सेंट्रल पर होस्ट किया गया म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट ट्रेसिंग एंड रिट्रीवल असिस्टेंट (एमआईटीआरए-मित्र) निवेशकों को दावा रहित और निष्क्रिय इनएक्टिव म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स का पता लगाने में मदद करता है। यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को बताए गए सर्च पैरामीटर्स का इस्तेमाल करके उस म्यूचुअल फंड की पहचान करने की सुविधा देता है जिसमें ऐसे निवेश हो सकते हैं।
फोलियो नंबर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर है जो म्यूचुअल फंड इंस्टीट्यूशन अपने निवेशकों को किसी खास योजना में उनकी संपत्ति को ट्रैक करने के लिए देते हैं। जब रिडेम्पशन, मैच्योरिटी प्रोसीडिंग्स, या डिविडेंड्स निवेशक के बैंक खाता में बदलाव या उसके बंद होने, अधूरे रिकॉर्ड, पुराने संपर्क विवरण, या केवाईसी अनुपालन लंबित होने जैसी वजहों से क्रेडिट नहीं होते हैं, तो म्यूचुअल फंड की रकम बिना दावे की रह जाती है।
ऐसे मामलों में, बीमा रकम डूबती नहीं है; ड्यू डेट पर, इसे तय अनक्लेम्ड स्कीम में हस्तांतरित कर दिया जाता है, जहां यह तब तक रहता है जब तक इसे क्लेम नहीं किया जाता। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड फोलियो को निष्क्रिय माना जाता है अगर निवेशक दस साल तक कोई लेन-देन नहीं करता है, भले ही फोलियो में यूनिट बैलेंस मौजूद हो।
एमआईटीआरए-मित्र बिना दावे वाले या निष्क्रिय निवेश की पहचान करने में मदद करता है, जिसके बाद निवेशक दावा प्रक्रिया शुरू करने के लिए संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) या रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) से संपर्क कर सकते हैं।
यह व्यवस्था बचाव के उपायों पर भी जोर देता है, निवेशक को केवाईसी विवरण, बैंक खाते की जानकारी और सम्पर्क रिकॉर्ड अद्यतन रखने के लिए बढ़ावा देता है, और भविष्य में दावा रहित निवेश से बचने के लिए बैंक खाता स्टेटमेंट को नियमित तौर पर देखते रहने के लिए कहता है।
बिना दावे वाले डिविडेंड और शेयर को, लगातार सात साल तक बिना पेमेंट या बिना दावे के रहने के बाद, कंपनियां इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (आईईपीएफए) को हस्तांतरित कर देती हैं। आईईपीएफए पोर्टल एक सर्च सुविधा देता है जिससे लोग पैन, नाम या कंपनी का नाम और डीमैट आईडी/फोलियो नंबर जैसी जानकारी डालकर बिना दावे वाले डिविडेंड, शेयर या डिपॉजिट का पता लगा सकते हैं।
आईईपीएफए के पास दावा करने का कोई शुल्क नहीं लगता है, और फंड में हस्तांतरित की गई रकम को क्लेम करने की कोई खास समय-सीमा नहीं है। सही क्लेम करने वाला रकम हस्तांतरित हो जाने के बाद किसी भी समय रिफंड के लिए आवेदन कर सकता है।
आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल नागरिकों तक सीधे पहुंचने पर जोर देती है, और देश भर में व्यापक और सबको साथ लेकर चलने वाली कवरेज पक्का करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को व्यवहार में लाने से जोड़ती है।
अक्टूबर 2025 में शुरू की गयी इस पहल को अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक तीन महीने के देशव्यापी अभियान के तौर पर लागू किया गया, जिसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को शामिल किया गया। यह अभियान 3ए फ्रेमवर्क जागरूकता (अवेयरनेस), पहुंच (एक्सेसिबिलिटी) और कार्रवाई (एक्शन) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सरल और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी यथोचित बचत की पहचान करने, उस तक पहुंचने और उसे पुन: प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।
अक्टूबर से 19 दिसंबर 2025 तक 668 जिलों में सुविधा सेवा शिविर लगाये गये। इन शिविरों में जन प्रतिनिधि, जिला प्रशासन, और बैंकों, बीमा कंपनियों और दूसरे वित्तीय संस्थान के अधिकारियों ने प्रमुखता से हिस्सा लिया, जिससे स्थानीय स्तर पर समन्वित और असरदार सर्विस डिलीवरी दुरूस्त हुई।
ये शिविर राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों और राज्य स्तरीय बीमा समितियों के जरिए जिले के प्रमुख बैंकों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर लगाये गये थे।
हेल्पडेस्क और डिजिटल कियोस्क के जरिए लोगों को दावा रहित वित्तीय परिसंपत्तियों को चेक करने और आसानी से दावा शुरू करने में मदद की गयी।
एनरोल करने और केवाईसी और री-केवाईसी फॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए भी बढ़ावा दिया गया, ताकि औपचारिक वित्तीय प्रणाली के साथ उनका लिंक मजबूत हो सके।
जिला स्तर पर इसे लागू करने से देश के मकसद स्थानीय स्तर पर ऐसे नतीजों में बदले जिन्हें मापा जा सके। बंद और बिना दावे वाले वित्तीय खाते की पहचान की गयी, दावे शुरू किये गये और कई मामलों में फायदों को वापस किया गया, जिसमें आउटरीच एक्टिविटी के दौरान मौके पर ही सेटलमेंट भी शामिल था। बैंकों, बीमा कंपनियों और दूसरे वित्तीय संस्थान के एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर शामिल होने से समन्वित सर्विस डिलीवरी मुमकिन हुई, लोगों के बीच बातचीत आसान हुई और प्रोसेस में होने वाली देरी कम हुई।
अभियान के दौरान सरकारी विभागों, नियामकों और वित्तीय संस्थानों की मिलकर की गयी कोशिशों से अच्छे नतीजे मिले। लगभग 2,000 करोड़ रुपये उनके असली मालिकों को लौटाये गये, जिससे उन परिवारों को वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ा गया जिन पर लंबे समय से कोई दावा नहीं कर रहा था।
वित्तीय वसूली के अलावा, इस पहल ने नामांकन, दस्तावेजीकरण और रिकॉर्ड रखने के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की, जिससे घर के स्तर पर ज्यादा असरदार वित्तीय योजना में मदद मिली।
आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक नागरिक-केंद्रित पहल है जो लोगों और परिवारों को उन वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ती है जिनपर उनका अधिकार बनता है। जागरूकता, आसान एक्सेस और समन्वित सुविधा सेवा को मिलाकर, यह पहल वित्तीय प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करती है और यह पक्का करती है कि बिना दावे वाली बचत की पहचान की जाये और उनके असली मालिकों को लौटायी जाये।
बड़े स्तर पर देखा जाये तो यह पहल वित्तीय संस्थान में भरोसा बढ़ाती है, वित्तीय समावेशिता को मजबूत करती है और जिम्मेदार वित्तीय तरीकों को बढ़ावा देती है। यह पक्का करके कि व्यक्तिगत बचत आसानी से मिल सकें, सुरक्षित रहें और हस्तांतरित हो सकें, आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक ज्यादा पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-प्रथम वित्तीय प्रणाली में योगदान देता है।
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