येसु धर्मसंघ के संस्थापक संत इग्नासियुस का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया

 

टीम एबीएन, रांची। आज येसु धर्मसंघ के संस्थापक संत इग्नासियुस का पर्व रांची में धूमधाम से मनाया गया। संत मारिया गिरजा में  रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद  की अगुवाई में समारोही मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया। इस अवसर पर रांची येसु धर्मसंघ के सभी पुरोहितों के लिए विशेष प्रार्थना की गई एवं छोटानागपुर में  शिक्षा एवं विकास में उनके योगदान की सराहना की गई।

आज रांची येसु धर्मसंघ के पुरोहितों एवं धर्म बंधुओं के लिए विशेष दिन रहा क्योंकि आज उनके संस्थापक लोयोला के संत इग्नासियुस का पर्व मनाया गया। इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने मिस्सा बलिदान अर्पित किया। उन्होंने अपने धर्मोपदेश में कहा कि कलीसिया एवं बाइबिल में अनेक संत हुए हैं जिनके जीवन हमारे लिए आदर्श रहा है। 

संत इग्नेशियुस भी हमारे लिए एक आदर्श है हमें भी  इग्नासियुस के समान प्रभु पर केंद्रित जीवन जीना है। इस प्रकार हम प्रत्येक क्षण एक आदर्श जीवन जीते हुए सच्चे ख्रीस्तीय कहलायेंगे। उन्होंने रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत में येसु धर्मसंघ के योगदान के उनके धर्मसंघ का आभार व्यक्त किया और इस अवसर पर बधाईयां एवं शुभकामनाएं भी दीं।

संत इग्नासियुस लोयोला का जीवन

संत इग्नासियुस काथलिक कलीसिया के महान संतों में से एक हैं जिन्होंने येसु समाज की स्थापना की। उन्होंने अपने जीवन को ईश्वर और मनुष्यों की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित कर दिया। उनका जीवन कठिन तपस्या, आंतरिक परिवर्तन और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत उदाहरण है।

संत इग्नासियुस लोयोला का जन्म सन् 1491 ई. में स्पेन के बास्क के एक छोटे से गाँव लोयोला में हुआ था। उनका असली नाम इनेगो लोपेज दे लोयोला था। वे एक समृद्ध और कुलीन परिवार से थे और उनका पालन पोषण भी राजसी वातावरण में हुआ था। बचपन से ही वे एक शूरवीर योद्धा बनना चाहते थे और अपनी युवावस्था में वे एक बेहद ही साहसी सैनिक बने। सैनिक बनने के बाद वे विभिन्न युद्धों में भाग लेने लगे।

सन् 1551 ई. में एक युद्ध के दौरान, उन्हें तोप के गोले से घुटने में गंभीर चोट लगी। उन्हें चिकित्सा के लिए, लम्बे समय तक अस्पताल में विस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने समय व्यतीत करने के लिए ईसा मसीह और विभिन्न संतों की जीवनियों को पढा। इन ग्रंथों को पढ़ने से उनके जीवन में गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन हुआ। उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग कर तप और साधना जीवन बिताना शुरू किया।

चोट से उबरने के बाद इग्नासियुस ने स्पेन और फिर फ्रांस की राजधानी पेरिस में उच्च शिक्षा हासिल की। इस दौरान निरंतर ध्यान और आत्म-निरीक्षण द्वारा गहराई से ईश्वर को जानने का प्रयास किया। अपने इन अनुभवों को उन्होंने आध्यात्मिक साधना नामक किताब में लिखा है। आध्यात्मिक साधना, एक अनूठी किताब मानी जाती है। आज भी यह पुस्तक आध्यात्मिक साधकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

1534 ई. में संत इग्नासियुस ने अपने छः मित्रों के साथ येसु समाज की स्थापना की। उनका उद्देश्य था ईश्वर की महत्तर महिमा के लिए शिक्षा-प्रसार, प्रेरितिक कार्य और समाज की सेवा करना। इस धर्मसमाज को 1540 ई. में संत पापा द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई। तब से लेकर आज तक इस धर्म समाज के द्वारा दुनिया भर में हजारों की संख्या में स्कूल कॉलेज और विश्वद्यिालय चलाए जा रहे हैं।

संत इग्नासियुस का निधन 31 जुलाई 1556 ई. को रोम में हुआ। उन्हें 1622 ई. में संत घोषित किया गया। उन्हीं की स्मृति में 31 जुलाई को उनका पर्व मनाया जाता है। संत इग्नासियुस का जीवन और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक आध्यात्मिक साधना हम सबों के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय है।

येसु धर्मसंघ के संस्थापक लोयोला के संत इग्नासियुस के पर्व के अवसर पर  रांची के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आइंद के आलावा,   येसु धर्मसंघ के प्रोविंशियल फाo अजित कुमार खेस, फाo सुधीर मिंज, फाo आनंद डेविड खलखो, टी ओ आर के प्रोविंशियल फाo मनोज वेंगतनाम, सिo मेरी ग्रेस तोपनो, सिo सुषमा, 50 से अधिक पुरोहितगण एवं हज़ारों की संख्या में ख्रीस्त विश्वासी शामिल हुए।

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