टीम एबीएन, कोडरमा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सांसदों के लिए जारी किए गए तानाशाहीपूर्ण आदेश की निंदा करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। माकपा राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व वाली भाजपानीत केन्द्र सरकार के द्वारा जारी आदेश में मानसून सत्र के दौरान सांसद, संसद भवन के परिसर में कोई भी विरोध कार्रवाई आयोजित नहीं कर सकते हैं, जो घोर निंदनीय है। संसद में सांसदगण, देश तथा जनता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना नजरिया पेश करने के लिए आए दिन विरोध कार्रवाइयां आयोजित करते हैं। जनता की आवाज उठाते हैं। भारतीय संसद के काम करना शुरू करने के बाद से ही यह सांसदों का जनतांत्रिक अधिकार रहा है। सांसदों के लिए जारी नया आदेश में अंसदीय शब्दों की सूची को बढ़ा दिया गया है और इसमें सरकार के खिलाफ अक्सर प्रयोग की जाने वाली अक्षमता, जुमलेबाजी जैसी संज्ञाओं को भी शामिल कर लिया गया है। जो अन्यायपूर्ण कदम है। साथ ही विरोध कार्रवाइयों पर प्रतिबंध लगाने का यह आदेश संसद पर, उसके स्वतंत्र काम-काज पर और सांसदों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर जबरदस्त हमला है। संसद में मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से परामर्श किए बिना ही, मनमाने तरीके से लिया गया यह फैसला, खुल्लमखुल्ला अलोकतांत्रिक फैसला है। इससे भी बदतर यह कि यह संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले किया गया है। सी पी आई (एम) केंद्र सरकार से मांग करता है कि इस अलोकतांत्रिक कदमों को फौरन वापस लिया जाए।
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