बड़कागांव कफ़न सत्याग्रह : 13 में से 11 में योगेंद्र-निर्मला हुए बरी, लेकिन...

 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने शनिवार को हजारीबाग से जुड़े कफन सत्याग्रह मामले में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक एवं उनकी पत्नी निर्मला देवी सहित 9 लोगों को दोषी करार देते हुए को छह-छह महीने की सजा सुनाई। अदालत ने इसके अलावा पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अपर लोक अभियोजक परमानंद यादव ने बताया कि अपर न्यायायुक्त विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने सभी गवाह और अन्य साक्ष्यों के आधार पर योगेंद्र साव, निर्मला देवी और मंटू सोनी समेत 9 लोगों को दोषी करार दिया है। सभी को छह-छह महीने सजा सुनाई गई है। इससे पहले भी बड़कागांव गोलीकांड मामले में योगेंद्र साव और उनकी पत्नी को अदालत ने दोषी करार देते हुए दस-दस साल की सजा सुनायी है। इस मामले में योगेंद्र साव और निर्मला देवी ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलीकर एनटीपीसी के खिलाफ कफन सत्याग्रह किया गया था। कफन सत्याग्रह के दौरान आंदोलनकारियों ने खनन कार्य में लगी मशीन को काम करने से रोक दिया गया था, जिसके बाद पुलिस ने बड़कागांव की स्थानीय विधायक निर्मला देवी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी दौरान पुलिस पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया और निर्मला देवी को लोग पुलिस हिरासत से छुड़ाकर ले गये। इस मामले में प्रशासन ने दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज कराये थे। वर्ष 2015 से जुड़े इस मामले में बड़कागांव में गोलीबारी हुई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। बाद में हिंसा के विभिन्न मामलों में योगेंद्र साव और उनकी पत्नी के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए, जिसमें 13 मामले में फैसला हो चुका है। इनमें से 11 मामलों में साव दंपती बरी हो चुके हैं, जबकि दो मामले में सजा हुई है।

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