छत्तीसगढ़ : डेढ़ घंटे के मुठभेड़ में 13 नक्सली ढेर

 

गढ़चिरौली। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बार्डर से लगे गढ़चिरौली जिले में शुक्रवार सुबह पुलिस और नक्सलियों के बीच शुक्रवार को जमकर फायरिंग हुई है। पुलिस की सी-60 यूनिट कमांडो ने गढ़चिरौली के एटापल्ली के जंगली इलाके में 13 नक्सलियों को मार गिराया। मारे गये नक्सलियों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं। सभी के शव जवानों ने बरामद कर लिये हैं। इस हमले में 4-5 नक्सलियों के घायल होने की भी खबर है। मुठभेड़ स्थल से भारी संख्या में हथियार भी मिले हैं। मुठभेड़ में मरे नक्सलियों की पहचान नहीं हो सकी है। इस संबंध में गढ़चिरौली के डीआइजी संदीप पाटिल ने पत्रकरों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुबह गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली के जंगली क्षेत्र से 13 नक्सलियों के शव बरामद किये गये हैं। महाराष्ट्र पुलिस की सी-60 इकाई और नक्सलियों के बीच फायरिंग जारी है। उन्होंने बताया कि आॅपरेशन महाराष्ट्र पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है और संभावना है कि मुठभेड़ में और नक्सलियों का सफाया हुआ है। डीआइजी ने बताया कि जिस समय पुलिस ने कार्रवाई की, उस वक्त नक्सली एक बैठक के लिए एकत्र हुए थे। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस के दल और सी-60 कमांडो ने जंगल में खोज अभियान शुरू किया। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने पुलिस दल को देखा और गोलीबारी शुरू कर दी। सी-60 कमांडो ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें 13 नक्सली मारे गये हैं। कई नक्सली भागने में सफल रहे। मुठभेड़ के बाद जवानों ने सर्चिंग शुरू की तो शवों के अलावा खून के निशान भी मिले हैं। ऐसे में संभावना है कि मुठभेड़ में 4 से 5 नक्सली गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, इसलिए मृतकों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। जवानों ने मौके से एके -47,राइफल, 303 राइफल, करबाइन, 12 बोर की राइफल और बड़ी मात्रा में विस्फोटक, तार का बंडल और अन्य सामान बरामद किया है। बढ़ती नक्सली गतिविधियों इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्कालीन एसपी केपी रघुवंशी ने 1 दिसंबर 1990 को सी-60 की स्थापना की। उस वक्त इस फोर्स में सिर्फ 60 विशेष कमांडो की भर्ती हुई थी, जिससे इसे यह नाम मिला। नक्सली गतिविधियों को रोकने के लिए गढ़चिरौली जिले को दो भागों में बांटा गया। पहला उत्तर विभाग, दूसरा दक्षिण विभाग। ??????इन कमांडो को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें दिन-रात किसी भी समय कार्रवाई करने के लिए ट्रेंड किया जाता है। इनकी ट्रेनिंग हैदराबाद, मनेसर, कांकेर, हजारीबाग में होती है। नक्सल विरोधी अभियान के अलावा ये जवान नक्सलियों के परिवार, नाते-रिश्तेदारों से मिलकर उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में बताकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का काम भी करते हैं। नक्सली इलाकों में ये प्रशासनिक समस्याओं की जानकारी भी जुटाते हैं।

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