टीम एबीएन, रांची। झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन विधेयक, 2022 के माध्यम से राज्य में 2 प्रतिशत एवं 1 प्रतिशत बाजार शुल्क प्रभावी किये जाने का निर्णय किसानों के साथ ही आम उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा तथा इससे महंगाई बढ़ेगी। ऐसे समय में जब कोविड के बाद से स्थितियां सामान्य दिशा में अग्रसर हैं के दौरान जनता पर अतिरिक्त शुल्क का भार देना, ईज आॅफ डूईंग बिजनेस की अवधारण के विपरीत है, जिसपर सरकार को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। प्रथम दृष्टया इस विधेयक के प्रावधान काफी जटिल और अव्यवहारिक प्रतीत होते हैं। वर्ष 2011-12 में भी अनाज को कर की श्रेणी में लाने के निर्णय पर मेरे पिताजी स्व0 आरडी सिंह जी ने इसका पुरजोर विरोध किया था। व्यापारियों के विरोध को देखते हुए सरकार ने इस निर्णय को वापस लिया था। राज्य में इस शुल्क को प्रभावी करने के पश्चात् पुन: विरोध-प्रदर्शन की स्थितियां बनेंगी। इसलिए राज्य के कृषकों, आम उपभोक्ता एवं व्यापारियों के हित में हम सरकार से इस विधेयक पर पुनर्विचार का आग्रह करते हैं। (लेखक डॉ अभिषेक रामाधीन, कार्यकारिणी सदस्य, एफजेसीसीआई हैं।)
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