एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली देखी जा सकेगी। इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक-2022 पेश किया है. जानिए इस बिल की अहम बातें... एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली देखी जा सकेगी। इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक-2022 पेश किया है। बिल कहता है कि किसी भी मामले में गिरफ्तार या दोषसिद्ध अपराधियों का रिकॉर्ड रखने में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बिल कई मायनों में खास है क्योंकि अब तक आरोपियों का रिकॉर्ड रखने के लिए पुलिस फिंगरप्रिंट और पैरों के निशान लेती थी लेकिन जल्द ही आंखों की पुतलियों के प्रिंट से लेकर उनकी लिखावट तक के नमूने तक लिए जाएंगे। अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार होगी। 1. केंद्र सरकार ने इस नए बिल को 102 साल पुराने मौजूदा कानून की जगह पेश किया है। अब तक पुलिस केवल अपराधियों का रिकॉर्ड रखने के लिए फिंगरप्रिंट और पैरों के निशान लेती थी, लेकिन नए बिल के जरिए इन पर शिकंजा कसा जाएगा। नए बिल के तहत अब अपराधियों की आंखों का प्रिंट लिया जाएगा। इसके अलावा हथेली और पैरों की छाप, फोटो, बायोलॉजिकल सैम्पल और लिखावट के नमूने भी लिए जाएंगे। आसान भाषा में समझें तो डिजिटली इनकी पहचान पुलिस के पास होगी। 2. बिल से एक बात साफ है कि केंद्र सरकार अपराधियों से जुड़ी हर वो जानकारी डिटिजली स्टोर करना चाहती है जो उन्हें पकड़ने और पहचानने में मदद करेगी। पूरा डाटा डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल होने पर एक क्लिक पर अपराधियों की हर जरूरी जानकारी सामने आ जाएगी। केंद्र सरकार का मानना है अपराधियों का ज्यादा ब्यौरा सामने होने पर सजा सुनाने के काम में तेजी आएगी। 3. बिल में बताई गईं बातों का रिकॉर्ड रखते समय अगर कोई अपराधी या दोषी इंकार करता है तो सजा और जुर्माना दोनों लगाया जा सकता है। बिल के मुताबिक, जांच से मना करने पर दोषी को तीन महीने की सजा या 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर दोनों ही हो सकता है। 4. बिल पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने कहा, बिल से जांच एजेंसियों को मदद मिलेगी। वहीं, लोकसभा में इस बिल का विरोध भी किया गया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, यह बिल अनुच्छेद 20 और 21 का उल्लंघन है। वहीं, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, अगर मेरे खिलाफ कोई मामला सामने आता है तो मेरा DNA जांचा जाएगा, इसका क्या मतलब है? 5. इस बिल को लेकर कांग्रेस, टीएमसी, आरएसपी, बीएसपी जैसे राजनीतिक दलों ने विरोध किया। उनके विरोध के बाद वोटिंग कराने की नौबत आई। विपक्ष की मांग पर हुई वोटिंग में विरोधी 58 मतों के मुकाबले पक्ष में आए 120 मतों के आधार पर सदन में इस पेश करने की मंजूरी दी गई।
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