एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कोरोना के मामले लगातार कम हो रहे हैं। कोरोना की शुरुआत के बाद ऐसा पहली बार है जब नए मामलों की संख्या इतनी कम हो गई है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 1259 नए मामले आए हैं और 35 लोगों की मौत हुई है। जहां एक तरफ भारत में कोरोना का दायरा सिकुड़ रहा है, वहीं, चीन और ब्रिटेन में इस वायरस की वजह से केस तेजी से बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए चीन के शंघाई शहर में लॉकडाउन लगा दिया गया है। ब्रिटेन में भी पिछले दो सप्ताह से नए मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन दोनों देशों में कोरोना के बढ़ने का कारण स्टेल्थ ओमिक्रॉन वेरिएंट है। आइए जानते हैं कि क्या है ये वेरिएंट और इससे क्यों बढ़ रहा है कोरोना : सफदरजंग हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर बताते हैं कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के सब वेरिएंट BA.2 को स्टेल्थ ओमिक्रॉन कहा जाता है। यह वेरिएंट सामान्य ओमिक्रॉन वेरिएंट की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है। भारत में संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान ओमिक्रॉन के साथ स्टेल्थ ओमिक्रॉन भी फैला था, लेकिन तब चीन या ब्रिटेन में यह वेरिएंट नहीं पहुंथा था। अब ये सब वेरिएंट इन देशों में तेजी से फैल रहा है, जिसकी वजह से वहां संक्रमण के नए मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि ये वेरिएंट फैल भले ही तेजी से रहा हो, लेकिन इससे हॉस्पिटलाइजेशन या मौत के मामलों में अधिक इजाफा नहीं हो रहा है। स्टेल्थ ओमिक्रॉन भी अपने मूल वेरिएंट की तरह ही है। ये संक्रामक ज्यादा है, लेकिन घातक नहीं। भारत में अगले चार से छह महीने तक नहीं है खतरा : कोविड एक्सपर्ट डॉ युद्धवीर सिंह का कहना है कि भारत में अगले चार से छह महीने तक कोरोना की किसी नई लहर के आने की आशंका काफी कम है। इसका कारण यह है कि यहां तीसरी लहर के दौरान एक बड़ी आबादी ओमिक्रॉन से संक्रमित हो चुकी है। इसके साथ ही वैक्सीनेशन भी चल रहा है। नेचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन से इम्यूनिटी बनी हुई है, जो अगले चार से छह महीने तक रह सकती है। ऐसे में पैनिक होने की जरूरत नहीं है।
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