मधुमक्खी पालन : कम खर्च में अधिक कमाई के लिए मदद कर रहा कृषि विज्ञान केंद्र

 

एबीएन डेस्क। शहद में पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्निशियम और आयरन जैसे 11 तरह के मिनरल भी पाए जाते हैं। यहीं वजह है कि 80 फीसदी शहद दवा के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। कॉस्मेटिक और कन्फेक्शनरी में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे आसानी से कोई भी कर सकता है। इस काम में खर्च काफी कम आता है, लेकिन इसे शुरू करने के लिए प्रशिक्षण बहुत जरूरी है। शहद को धरती का अमृत कहा जाता है। दुनिया भर 9 लाख 92 हजार टन के आसापस शहद का उत्पादन हो रहा है। भारत में करीब 33 हजार 425 टन शहद हर साल निकाला जाता है। शहद अपने आप में एक संपूर्ण भोजन है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 70 से 80 फीसदी होती है। इसके अलावा शहद में ग्लुकोज, सुक्रोज और फ्रक्टोज भी पाया जाता है। कुछ मात्रा प्रोटीन की भी होती है। शहद में 18 तरह के अमीनो एसिड भी मौजूद हैं। ये शरीर में उत्तकों का निर्माण करते हैं, जो हमें स्वस्थ बनाते हैं। शहद में पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्निशियम और आयरन जैसे 11 तरह के मिनरल भी पाए जाते हैं। यहीं वजह है कि 80 फीसदी शहद दवा के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। कॉस्मेटिक और कन्फेक्शनरी में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। मधुमक्खियां फूलों पर मंडरा कर शहद चुनती हैं और एक फूल से दूसरे फूल पर जाने की वहज से फसल में परागण की क्रिया तेज हो जाती है, जिससे किसान को ज्यादा फसल मिलती है। कमाई बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन अच्छा विकल्प : गुजरात के नवसारी जिले के रहने वाले अशोक भाई पटेल के पास 10 एकड़ जमीन है, जिस पर वे आम, गन्ना, चीकू और सब्जी की खेती करते हैं। साथ ही में घरेलू इस्तेमाल के लिए मधुमक्खी पालन भी करने लगे। एक बक्से से शुरुआत करने वाले अशोक भाई आज शहद पालन के व्यवसाय में उतर चुके हैं। आज वे 600 बक्से से 12 हजार किलो तक शहद का उत्पादन करते हैं। एक ही जगह पर सालभर फूल मिलना मुकमिन नहीं है। इस वजह से किसानों को एक जगह से दूसरे जगह बक्से लेकर जाना पड़ता है। अशोक 5 साल से शहद उत्पादन कर रहे हैं। वे इस काम में महारत हासिल कर चुके हैं और अब दूसरे किसानों को प्रशिक्षण भी देते हैं। अगर आप कम मेहनत में कमाई बढ़ाना चाहते हैं तो मधुमक्खी पालन अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प : देश में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। शहद उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण ही भारत से निर्यात में भी तेजी आई है। एपीडा के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-20 में भारत ने 59 हजार मीट्रिक टन से अधिक शहद का एक्सपोर्ट किया था। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के लिए मधुमक्खी पालन एक जबरदस्त विकल्प है। कम लागत में उन्हें अधिक मुनाफा हासिल करने में मदद मिलेगी। देश भर में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों से किसान मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण ले सकते हैं। यहां के वैज्ञानिक किसानों को न सिर्फ मदद करते हैं बल्कि समय-समय पर आकर मधुमक्खी पालन के कार्य का निरीक्षण भी करते हैं और इस काम में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए किसानों को सलाह देते हैं।

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