एबीएन एडिटोरियल डेस्क। एक तरफ देश में कर्मशील कर्मचारियों को जीवनपर्यंत सेवाओं के बावजूद पेंशन नसीब नहीं है। वहीं राज्यों में निर्वाचित माननीय विधायकों को न केवल भरपूर पेंशन मिल रही है, बल्कि हर बार चुने जाने पर अतिरिक्त पेंशन चक्रवृद्धि ब्याज की तरह उनके खाते में जुड़ती चली जा रही है। विगत में पंजाब में विपक्ष में रहते हुए आम आदमी पार्टी ने इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग की थी। अब जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार भरपूर बहुमत से सत्ता में लौटी है तो इस दिशा में गंभीर पहल की बात कही जा रही है। कोशिश की जा रही है कि राज्य में "एक विधायक, एक पेंशन" की व्यवस्था हो। यानी हर कार्यकाल की अलग पेंशन लेने की व्यवस्था पर विराम लगे। आप पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी में एक विधायक, एक पेंशन के मुद्दे पर उच्च स्तर पर विमर्श किया जा रहा है। दरअसल, पिछली विधानसभा में भी आप विधायकों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। तब नेता प्रतिपक्ष के रूप में हरपाल चीमा ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में सुझाव दिया था कि पूर्व विधायकों को सिर्फ एक पेंशन का भुगतान किया जाये। दरअसल, एक कार्यकाल के लिये विधायक को 75,150 की पेंशन के अलावा प्रत्येक पिछले कार्यकाल के लिये पेंशन राशि का 66 फीसदी अतिरिक्त दिया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल, कांग्रेस नेता लाल सिंह और पूर्व मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर को 3.25 लाख की पेंशन मिलती है। इसी मुहिम के बीच में पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल ने अपनी पेंशन छोड़ने की बात कही है। दरअसल, उन्हें फिलहाल 5,76,150 रुपये की पेंशन मिलती है। राज्य में करीब 325 पूर्व विधायकों को पेंशन मिल रही है। यही वजह है कि राज्य में निर्वाचित माननीयों के सरकारी खर्च में राजयोग को लेकर जनता में अक्सर रोष नजर आता रहा है। इसके चलते आम आदमी पार्टी ने जनभावना को महसूस करते हुए इस दिशा में कदम बढ़ाया है। दरअसल, यही वजह है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान के मुख्यमंत्री पद संभालने के दूसरे ही दिन शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली पेंशन छोड़ने की घोषणा करनी पड़ी। वे लांबी विधानसभा सीट से दस बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि, इस बार उन्हें आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने हरा दिया था। दरअसल, पिछली कांग्रेस सरकार में सरकारी धन से जनप्रतिनिधियों के आयकर के भुगतान का मुद्दा भी उठा था। एक आरटीआई के जरिये एकत्र जानकारी के अनुसार, प्रकाश सिंह बादल व नवजोत सिद्धू समेत 93 विधायकों का आयकर पंजाब सरकार भर रही थी। उसी वक्त यह मुद्दा भी उछला कि सिर्फ इनकम टैक्स की ही विसंगति नहीं है, बल्कि तमाम नेता एक से ज्यादा पेंशन ले रहे हैं। तब इस बाबत विपक्षी दलों ने विधानसभा में मुद्दे को उठाया था जिसके चलते तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी को इस बाबत आप नेताओं ने ज्ञापन भी सौंपा। अब कयास लगाये जा रहे हैं कि बदलाव के मुद्दों को लेकर सत्ता में आई आप सरकार के मुखिया भगवंत मान इस बाबत कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। भले ही आम आदमी पार्टी की यह मुहिम प्रतीकों की राजनीति का विस्तार हो, लेकिन यह परिपाटी हमारे सत्ताधीशों की नैतिकता पर सवाल खड़ी करती है। एक राज्य जहां अर्थव्यवस्था पहले ही हिचकोले खा रही हो, राज्य में बेरोजगारी का सैलाब हो, युवा रोजगार के लिये विदेश पलायन कर रहे हों, वहां हमारे माननीय कई-कई पेंशनों के सुख भोग रहे हैं। सही बात है कि यदि यह कोशिश सिरे चढ़ती है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत होगी। अन्य राज्यों में भी ऐसी पहल हो सकती है। आप को हासिल जनादेश को देखते हुए इस बदलाव की पहल की तार्किक परिणति को लेकर भरोसा भी जताया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो कहा जा सकेगा कि आप वाकई आम आदमी पार्टी की सरकार है जिसे लोकतंत्र के लिये सुखद संकेत ही कहा जायेगा।
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