अब 4जी जैमर झारखंड की जेलों में लगायेंगे मोबाइल की घंटी पर रोक

 

टीम एबीएन रांची। झारखंड के सभी जिलों में अब 4जी जैमर लगाने की तैयारियां शुरू कर दी गई है। इसके लिए ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। जेल प्रशासन ने जेल के अंदर अब मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जेल 4जी जैमर लगाने की तैयारी कर ली है। जल्द ही इसकी कवायद शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए दो कंपनियों का चयन किया गया है। एक कंपनी के द्वारा झारखंड के कई जिलों में 4जी का ट्रायल भी किया गया जो सफल हुआ है। झारखंड के सभी जेलों में 2जी जैमर लगा हुआ है, लेकिन अपराधी 4जी सिम का इस्तेमाल करते हैं। जेल प्रशासन के लाख प्रयास के बावजूद जेल के अंदर मोबाइल बड़ी आसानी के साथ पहुंच जाता है। जिसके बाद बड़े अपराधी से लेकर छोटे अपराधी जेल के अंदर से बैठकर ही अपनी सल्तनत चलाते हैं। यही वजह है कि अब 4जीजैमर लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। झारखंड के जेल आईजी मनोज कुमार ने बताया कि झारखंड के रामगढ़ जिले में जैमर का सफल डेमो भी हो चुका है। जिसमे जेल के अंदर जैमर की क्वालिटी भी टेस्ट हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा सर्टिफाइड बेल और ईसीएल के जैमर की टेस्टिंग हुई है। बेल की तरफ से रेट का कोटेशन भी दिया जा चुका है तो वही एउकछ के कोटेशन का इंतेजार जेल प्रशासन को है जिसके आने के साथ ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। बिरसा मुंडा जेल में लगेगा जैमर : शुरूआती चरण में इसे रांची के स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार होटवार में इंस्टॉल किया जाएगा। जिसके बाद दो महीने के सफल संचालन के बाद ही झारखंड के दूसरे जेलों में इन जैमरों को इंस्टॉल करने का कार्य शुरू हो जाएगा। झारखंड के जेल आईजी मनोज कुमार का कहना है कि जैमर की खरीद केंद्रीय गृह मंत्रालय के ही सर्टिफाइड कंपनियों से करनी होती है और इसके लिए दो ही एजेंसियां हैं इएछछ और एउकछ। उन्होंने बताया कि इन जैमरों से सिर्फ जेल की चारदीवारी के अंदर का ही नेटवर्क जाम करना होता है। जेल के बाहर इसका कोई प्रभाव नही पड़ता है। इसे भी डेमो के दौरान चेक किया गया है। वहीं उन्होंने बताया कि रामगढ़ में कुल 24 जैमर लगा कर डेमो किया गया था। जेल आईजी ने बताया कि इन जैमरों से मोबाइल नेटवर्क से किसी भी तरह की कॉल चाहे वो इंटरनेट कॉल हो या फिर बेसिक कॉल दोनों बाधित हो जाएंगी। बड़े अपराधी चला रहे हैं जेल से ही सल्तनत : झारखंड के कुख्यात अपराधी जेल से ही अपनी सल्तनत चला रहे हैं। अखिलेश सिंह, सुजीत सिन्हा, अनिल शर्मा, अमन सिंह, अमन साव, सुरेंद्र बंगाली और तिवारी गिरोह जैसे गैंगस्टर जेल में बैठे बैठे अपने गिरोह का संचालन कर रहे हैं। ये अपराधी सरकारी अधिकारियों से लेकर बड़े ठेकेदारों से रंगदारी वसूलते हैं। यह सारी गतिविधियां फोन से ही संचालित की जाती रही है। फोन जाने पर डर के कारण हर कोई रंगदारी देकर अपने आप को सुरक्षित रखना चाहता है। जेल से रंगदारी के बढ़ते मामलों को लेकर झारखंड पुलिस भी बैकफुट पर है और नई रणनीति के तहत काम करने की कोशिश कर रही है। एक सप्ताह के अंदर लगेगा मेटल डिटेक्टर : 4जी जैमर के साथ साथ जेल में अब मेटल डिटेक्ट स्कैनर भी लगाया जाएगा। जेल प्रशासन की ओर से इसकी तैयारी चल रही है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि एक सप्ताह के भीतर नया स्कैनर जेल में लगा दिया जाएगा। स्कैनर लगने के बाद कोई सामान चाहे वह कैदियों का हो या फिर पुलिसकर्मियों का स्कैन होकर ही भीतर जाएगा। इसके पता चल जाएगा कि जेल के भीतर क्या सामान गया है।

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