एबीएन सेंट्रल डेस्क। गोरखपुर जिले में विधानसभा चुनाव में मोदी-योगी की डबल इंजन की सरकार का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला है। जनता ने सरकार की योजनाओं को सराहा है, इस कारण राशन से शासन का रास्ता साफ हो पाया है। वहीं, सीएम योगी के बुलडोजर ने जातीय समीकरण ध्वस्त कर दिए। भाजपा ने जरूरतमंदों को मुफ्त राशन देकर और अपराधियों के घर पर बुलडोजर चलाकर अपनी जीत की पटकथा पहले ही लिख दी थी। कोरोना संक्रमण के दौरान बड़ी संख्या में जब लोग घरों में कैद हो गए थे, तब मोदी और योगी सरकार ने जरूरतमंदों को मुफ्त राशन देकर बड़ी राहत पहुंचाई थी। चुनाव प्रचार के दौरान भले ही मतदाता खामोश थे, लेकिन बातचीत में वे राशन मिलने की बात को मजबूती से रखते थे। यह मतदाताओं का भाजपा के पक्ष में खामोशी से बड़ा संदेश था। वहीं, चुनाव में सुरक्षा बड़ा मुद्दा रहा। योगी का बुलडोजर खूब दौड़ा। महिला वोटरों ने सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा को पसंद किया। अन्य मुद्दे गौण हो गए। गोरखपुर मंडल में इस समीकरण का असर साफ देखने को मिला है। चुनावी परिणाम बताते हैं कि छह विधानसभा क्षेत्रों में बसपा लड़ाई में ही नहीं दिखी। पहले चक्र की गणना से ही पार्टी के प्रत्याशी बहुत पीछे थे। आंकड़े गवाह हैं कि बसपा के कैडर वोटरों ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। चिल्लूपार, खजनी और सहजनवां में ही बसपा कुछ हद तक मतदाताओं को सहेजने में कामयाब रही। लेकिन, यहां भी वर्ष 2017 में जितने वोट बसपा को मिले थे, इस बार उतने नहीं मिले। चिल्लूपार से तीन बार से बसपा चुनाव जीतती रही। इस बार बसपा तीसरे स्थान पर खिसक गई। गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, चौरीचौरा, पिपराइच और कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी लड़ाई में ही नहीं रहे। जाहिर है कि बसपा के कैटर वोट बैंक में भाजपा सेंधमारी करने में कामयाब रही। ओबीसी और ब्राह्मण समाज के ज्यादातर लोगों के वोट भी भाजपा के खाते में आए।
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