एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने नौ हजार करोड़ रुपये की बैंक ऋण धोखाधड़ी के आरोपी भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में सजा की अवधि पर बृहस्पतिवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने अवमानना कानून के विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं न्याय मित्र जयदीप गुप्ता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने पूर्व में माल्या का प्रतिनिधित्व कर चुके वकील को इस मामले में मंगलवार तक लिखित दलीलें पेश करने की अनुमति दी। शीर्ष अदालत ने माल्या को दिये गये लंबे वक्त का हवाला देते हुए 10 फरवरी को सुनवाई की तारीख तय कर दी थी और भगोड़े कारोबारी को व्यक्तिगत तौर पर या अपने वकील के जरिये पेश होने का अंतिम मौका दिया था। माल्या को अवमानना के लिए 2017 में दोषी ठहराया गया था और उनकी प्रस्तावित सजा के निर्धारण के लिए मामले को सूचीबद्ध किया जाना था। शीर्ष अदालत ने 2017 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए माल्या की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका 2020 में खारिज कर दी थी। न्यायालय ने अदालती आदेशों को धता बताकर अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ डॉलर अंतरित करने को लेकर उन्हें अवमानना का दोषी माना था।
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