एबीएन सोशल डेस्क। क्या स्मोकिंग छोड़ने के बाद वजन इतना बढ़ जाता है कि चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है, क्या इंसान डिप्रेशन से जूझने लगता है या परमानेंट खांसी की समस्या हो जाती है? स्मोकिंग छोड़ने को लेकर ऐसे कई भ्रम प्रचलित हैं, लेकिन इसका सच कुछ और ही है। आज नो-स्मोकिंग डे है। हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को यह दिन सेलिब्रेट किया जाता है। इसे मनाने का लक्ष्य धूम्रपान रोकने के लिए लोगों को जागरुक करना है। इस मौके पर जानिए स्मोकिंग छोड़ने को लेकर सबसे ज्यादा प्रचलित भ्रम और उनकी सच्चाई… भ्रम : क्या स्मोकिंग छोड़ने के बाद वजन बढ़ने से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है? सच : यह सबसे कॉमन भ्रम है। इस पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का कहना है, स्मोकिंग छोड़ने के बाद थोड़ा वजन बढ़ता है, लेकिन इसे कंट्रोल भी किया जाता है। वजन इतना नहीं बढ़ता है कि चलने-फिरने में दिक्कत हो। एवरीडे हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, धूम्रपान छोड़ने के बाद जो वजन बढ़ता है वो स्मोकिंग के असर के मुकाबले बुरा बिल्कुल नहीं है। भ्रम : धूम्रपान छोड़ने के बाद इंसान लम्बे समय के लिए डिप्रेशन में चला जाता है। सच : सायकोसोशल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर रॉबर्ट गार्डनर का कहना है, कुछ लोगों को लगता है कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद मूड स्विंग की प्रॉब्लम होती है जो डिप्रेशन में बदल सकती है। रॉबर्ट का कहना है, अगर कोई इंसान पहले से ही डिप्रेशन से जूझ रहा है और स्मोकिंग छोड़ता है तब यह बढ़ सकता है। हालांकि इसका इलाज किया जाता है। सभी मामलों में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं। भ्रम : धूम्रपान छोड़ने पर अनियंत्रित खांसी की समस्या हो जाती है। सच : विशेषज्ञ कहते हैं, यह भी लोगों के बीच एक प्रचलित भ्रम है। वो मानते हैं कि स्मोकिंग छोड़ने पर उन्हें लगातार खांसी की समस्या से जूझना पड़ेगा। लेकिन इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। भ्रम : सिगरेट छोड़कर ई-सिगरेट पीना सुरक्षित है। सच : विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर लोगों को यही लगता है, लेकिन इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। अमेरिकी डॉक्टर्स ने यह पाया है कि ई-सिगरेट में ऐसे केमिकल और हैवी मेटल पाए जाते हैं जो सीधे फेफड़े तक पहुंचते हैं और इन्हें डैमेज करते हैं। इसलिए इसे सिगरेट छोड़ने का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। भ्रम : अलग तरह के फिल्टर स्मोकिंग के खतरे से बचा सकते हैं। सच : कई ऐसी सिगरेट हैं, जिन्हें लाइट सिगरेट की कैटेगरी में रखा जाता है। दावा किया जाता है कि इनमें फिल्टर, पेपर और ऐसी तम्बाकू का इस्तेमाल किया गया है जो फेफड़ों पर पड़ने वाले खतरों को कम करते हैं। इस तरह की लाइट सिगरेट पर रिसर्च की गई। रिसर्च में सामने आया कि ये बिल्कुल भी हेल्दी नहीं हैं और न ही खतरे को कम करती हैं।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse