10 लाख यूक्रेनी बच्चे नॉर्मल लाइफ और फ्रेंड्स छोड़ने को हुए मजबूर

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अपने गृह नगर खारकीव पर बमबारी शुरू होने पर अन्नामारिया मसलोवस्का दोस्तों, खिलौनों और यूक्रेनी जीवन को छोड़कर अपनी मां के साथ पलायन के लिए कई दिन लंबे पथ पर चल पड़ी ताकि पश्चिमी देशों में सुरक्षित ठिकाना मिल सके। अंतत: सैकड़ों अन्य यूक्रेनी शरणार्थियों के साथ ट्रेन से हंगरी की सीमा पार करने के बाद 10 वर्षीय अन्नामारिया ने कहा कि वह खारकीव के अपने दोस्तों को लेकर चिंतित है। सीमावर्ती शहर जाहोनी में उसने स्पष्ट अंग्रेजी भाषा में कहा, मैं उन्हें वाकई बहुत याद करती हूं, क्योंकि मैं उनसे संपर्क नहीं कर सकती। वे सिर्फ मेरे संदेश पढ़ते हैं। मुझे नहीं पता कि वे कहां हैं, मुझे उनकी चिंता है। अन्नामारिया अपनी मां की इकलौती संतान है, जो रूस के हमला करने के बाद दो हफ्ते में यूक्रेन से पलायन करने वाले 10 लाख बच्चों में शामिल है। इसका मतलब है कि युद्ध के चलते पलायन करने वाले 20 लाख से अधिक लोगों में लगभग आधी संख्या बच्चों की हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसे यूरोप में सबसे तेजी से बढ़ता शरणार्थी संकट करार दिया है। देश छोड़कर जाने वालों में से अधिकांश यूक्रेन की पश्चिमी सीमा पर हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया, रोमानिया और मोल्दोवा जैसे देशों में दाखिल हो रहे हैं। अधिकांश पोलैंड में चले गए, जहां पोलिश सीमा रक्षक एजेंसी के अनुसार 13.3 लाख शरणार्थियों ने सीमा पार की है। मोल्दोवा की प्रधानमंत्री नतालिया गवरिलिता ने रविवार को सीएनएन को बताया कि उनके देश में हर आठ में से एक बच्चा शरणार्थी है। यूक्रेन की राजधानी कीव पर बमबारी के बाद इमरात के भूतल में शरण लेने को मजबूर हुई नौ वर्षीय वेलेरिया वारेंको अपनी मां जूलिया और छोटे भाई के साथ पलायन करने को मजबूर हुईं। दो दिन तक दिन-रात गाड़ी चलाने के बाद परिवार हंगरी के बरबास स्थित एक अस्थायी शरणार्थी स्वागत केंद्र तक पहुंचने में सफल रहा। वेलेरिया ने कहा कि वह यूक्रेन में छूट गए बच्चों को सावधान करना चाहती हैं कि वह सतर्क रहें और सड़क पर पड़ी किसी भी वस्तु को नहीं छुएं, क्योंकि वह बम हो सकता है। उसने कहा कि उसके पिता कीव की तरफ बढ़ रहे रूसी सैनिकों से शहर की रक्षा करने में मदद करने के लिए यूक्रेन में रुक गये। उसने कहा कि उसे अपने पिता पर बहुत गर्व है और वह उन्हें बहुत याद करती है। वारेंको ने कहा कि यदि उसके पिता भी उसके पास आ जाएं तो उसे अच्छा लगेगा, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें आने की अनुमति नहीं मिली। वारेंको की 30 वर्षीय मां जूलिया ने कहा कि उन्होंने खुद डरने के बावजूद बेटी को मजबूत और बहादुर बनने के लिए कहा। जूलिया कहती हैं कि उनके लिए सबसे अहम चीज पूरे परिवार को साथ रखना है। जूलिया प्रार्थना करती हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो और वह अपने घर लौट सकें। मां और दादी बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए यूक्रेन की सीमा पार कर रही हैं, क्योंकि 18 से 60 वर्ष के यूक्रेनी पुरुषों को देश छोड़ने की अनुमति नहीं है। इस नीति का मकसद रूसी बलों के खिलाफ लड़ने के लिए पुरुषों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। खारकीव 15 लाख आबादी के साथ यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जिस पर रूस ने जबरदस्त बमबारी की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले को स्पष्ट और निर्विवाद आतंक कहा है। अन्नामारिया भले ही केवल नौ वर्ष की है, लेकिन बहुत समझदार है। एक शरणार्थी का जीवन जी रही अन्नामारिया अमेरिका में एक अभिनेत्री बनना चाहती है और उसे इस बात पर गर्व है कि वह अच्छी अंग्रेजी बोल लेती है। उसकी मां विक्टोरिया ने अब हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट की यात्रा करने की योजना बनाई है, लेकिन यह नहीं पता कि इसके बाद कहां जाएंगी। लेकिन अन्नामारिया पेरिस में डिज्नीलैंड की सैर करने की उम्मीद कर रही हैं। अन्नामारिया ने कहा कि एक बार युद्ध समाप्त होने के बाद वह खारकीव वापस जाकर अपने दोस्तों से फिर से मिलना चाहती है। उसने कहा, अगर युद्ध खत्म होता है, तो मैं वाकई अपने घर जाना चाहूंगी क्योंकि वहां मेरे दोस्त हैं। मेरे घर के पीछे सुंदर पार्क, सुपरमार्केट और खेल का मैदान है।

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