दलिया और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं, लेकिन दोनों में इतना अंतर क्यों?

 

एबीएन हेल्थ डेस्क। जब भी हेल्दी खाने की बात होती है तो सबसे पहले नाम दलिया का आता है। दलिया खाने में काफी फायदेमंद माना जाता है और मैदा को खाने से मना किया जाता है। लेकिन, कभी आपने सोचा है कि आखिर दलिया और मैदा गेहूं से ही बनाए जाते हैं, लेकिन दोनों में इतना अंतर क्यों होता है। एक फायदेमंद है तो एक को खाने से मना किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों है। कैसे बनते हैं दलिया और मैदा? दलिया भी गेहूं से बनता है और दलिया बनाने के लिए पहले गेहूं को पीसा जाता है। लेकिन, दलिया बनाते वक्त पूरी तरह से पीसा नहीं जाता है, छोटे-छोटे टुकड़े ही किए जाते हैं। अगर इसे ज्यादा बारीक पीस दिया जाए तो ये आटा बन जाता है। दलिया एक तरीके से गेहूं की किनकी है, जैसे चावल की होती है और यह टूटे हुए चावल होते हैं। वहीं, मैदा भी गेहूं से बनाया जाता है और इसकी प्रक्रिया अलग होती है। मैदा बनाने के लिए सबसे पहले मील में सभी गेहूं के दाने की ऊपरी परत निकलकर अलग हो जाती है। इस ऊपरी परत को हटाकर सफेद वाले हिस्से का काफी बारीक पिसा जाता है। यह पूरी तरह सफेद होता है और इसे पिसने के बाद 80 जाल प्रति इंच वाली चलनी से छाना जाता है और इसे एकदम बारीक कर दिया जाता है। छिलके हटने से यह हल्का पीला भी नहीं होता है और एकदम सफेद होता है गुणों में क्यों है अलग? दलिया और मैदा में इसलिए अलग अलग गुण होते हैं, क्योंकि दलिया सीधे गेहूं से पीसा जाता है। इससे इसके पोषक तत्व इसी में रहते हैं और यह काफी लाभदायक होता है। वहीं मैदा को बनाने में छिलके हटाया जाए हैं और गेंहू के इन छिलकों में ही सबसे ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते हैं। ऐसे में मैदा में ये पोषक तत्व नहीं होते हैं और सफेद हिस्से में स्टार्च आदि होने से यह शरीर के लिए नुकसान दायक होते हैं। इसलिए मैदा को हेल्थ के लिए नुकसान दायक माना जाता है और इसे ना खाने की सलाह दी जाती है।

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