सपा के वोटबैंक में भाजपा ने कर दी सेंधमारी?

 

एबीएन डेस्क। यूपी की सोशल इंजीनियरिंग के समीकरण इस बार बता रहे हैं कि किस पार्टी ने किस जाति को कैसे साधा। किस जाति के वोटरों ने किस राजनीतिक पार्टी की बातों और वादों पर भरोसा किया और किस पर नहीं। एक सर्वे के नतीजों के अनुसार कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी अपने पुराने वोटबैंक के अलावा अन्य जातियों को प्रभावित नहीं कर सकी। भले ही अखिलेश ने नई पार्टी का दावा किया हो, लेकिन दूसरी जातियों ने इसे इतना कबूल नहीं किया कि समर्थन वोट में तब्दील हो। जानिए क्या कह रहे हैं जातिगत वोटिंग के आंकड़े। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति से बड़ा सच किसी और फैक्टर को नहीं माना जाता। जबकि एग्जिÞट पोल्स के नतीजों में भाजपा को उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार बहुमत मिलना तय बताया गया है, तब इस पर चर्चा शुरू हो गई है कि जातिगत आधार पर हुई वोटिंग का फायदा आखिर किस तरह किस पार्टी को मिला है। इस वोट शेयरिंग को जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर इस सवाल के पीछे तथ्य क्या है। पहले भी एग्जिट पोल में सटीक भविष्यवाणी कर चुके टुडेज चाणक्य के सर्वे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा को 275 से 313 और अखिलेश यादव की सपा को 86 से 124 सीटें तक मिलने के दावे के बाद से ही अटकलों का दौर जारी है। इस सर्वे के मुताबिक यही दो पार्टियां यूपी के वोटरों के बीच मुकाबले में दिख रही हैं क्योंकि यह सर्वे बसपा को अधिकतम 4 और कांग्रेस को अधिकतम 2 सीटों पर सिमटा हुआ बताता है। टुडेज चाणक्य ने एग्जिÞट पोल देने से पहले यूपी की राजनीति को समझने व समझाने के लिए वोटरों के बीच जातिगत सर्वे भी कराया। इसके नतीजों से साफ हो रहा है कि चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य समेत ओबीसी समुदाय के जो एक दर्जन से ज्यादा नेता सपा में जुड़े थे, उनसे भी सपा को पिछड़े वर्ग के वोट का बहुत ज्यादा फायदा नहीं हुआ है। जाति के आधार पर देखिए कि कहां से वोट किस पाले में गए। ब्राह्मणों, राजपूतों ने किसे दिये कितने वोट : टुडेज चाणक्य के एग्जिÞट पोल की मानें तो यूपी में ब्राह्मणों की कुल आबादी में से 65 प्रतिशत और राजपूतों की संख्या से 71 प्रतिशत भाजपा के साथ रही। इधर समाजवादी पार्टी को 16 फीसदी ब्राह्मणों और 11 फीसदी राजपूतों का साथ मिलने का अनुमान दिया गया है। सर्वे के दावे के मुताबिक 9 फीसदी ब्राह्मणों और 4 फीसदी राजपूतों ने बसपा के पक्ष में वोटिंग की है। यादवों और मुस्लिमों का वोटबैंक किसके साथ : 73 फीसदी यादव और 76 फीसदी मुस्लिमों ने अखिलेश का साथ दिया है। यही दो वोटर वर्ग सपा के प्रमुख वोट बैंक माने जाते रहे हैं। बीजेपी के पक्ष में 8 फीसदी मुस्लिमों और 18 फीसदी यादवों के वोट पड़ने को बीजेपी के लिए एक उप?लब्धि के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि यह वर्ग सपा का कोर वोटर है। 7 फीसदी मुस्लिम और 4 फीसदी यादव मायावती के समर्थन भी दिखे हैं। अन्य वर्गों के वोटरों का रुख क्या रहा : यूपी की सियासत में जाटव, एससी और ओबीसी वोट भी काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस सर्वे के मुताबिक 34% जाटव, 64% ओबीसी और 45% एससी वोट भाजपा के पाले में गए हैं। यानी साफ है कि बड़ी संख्या में वोटरों ने कमल के फूल को समर्थन दे दिया है। साइकिल के पैडल चलाने में 10% जाटव और 23% ओबीसी रुचि लेते दिखे हैं। इसका मतलब यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के दावे साइकिल के पहियों में हवा नहीं भर सके। 47% जाटव, 28% एससी और 6% ओबीसी वोटर हाथी पर सवार नजर आए हैं।

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