किसानों के लिए वरदान है पीएम मत्स्य संपदा योजना

 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (सुनीता सिंह)। नब्बे के दशक की शुरूआत में जहां देश में आर्थिक उदारीकरण बड़ा जोर -शोर से हो रहा था, वहीं दूसरी ओर इस प्रक्रिया में कृषि क्षेत्र बहुत ही पीछे छूट गया था।और भारत अपनी बढ़ती आबादी का भरण पोषण करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने को मजबूर था। वर्तमान में नरेंद्र मोदी की सरकार कृषि के क्षेत्र में चौतरफा प्रयास करते हुए कृषि और कृषि से जुड़े विभिन्न तरह के व्यवसाय को सामने लाकर आत्मनिर्भर भारत कृषि कार्यक्रम को और मजबूत करते जा रही है। केंद्र की मोदी सरकार देश में कृषि और किसानों को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इस बार के बजट में कृषि पर लगभग 40 लाख करोड़ रुपए का आवंटन इसी बात को दर्शाता है। इसके साथ ही कृषि और खेती किसानी से जुड़े क्षेत्रों पर अलग-अलग जोर देते हुए कृषि को समग्रता में देखने की कोशिश भी की जा रही है ।मोदी सरकार ने खेती किसानी के लिए व्यापक सोच के साथ अनेकों संभावनाओं को देखते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी लाई है। खेती किसानी पर बात करने से ही सामान्य धारणा बनती है- अनाज और सब्जी का उत्पादन। लेकिन मोदी सरकार ने आम जनों के बीच कृषि को समग्रता में देखने की दृष्टि भी पैदा की और साथ ही इसे जमीन पर उतारने की भरपूर कोशिश भी की है। मसलन पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, पोल्ट्री फॉर्म, तसर सिल्क उत्पादन आदि अनेकों ऐसे व्यवसाय हैं, जिस पर जोर दिया जा रहा है और साथ ही रोजगार के व्यापक द्वार को खोलने की कोशिश भी जारी है। केंद्र सरकार द्वारा देश में कृषि से जुड़े किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही है। इसके लिए देश के कृषि गतिविधियों से जुड़े किसानों, पशुपालकों के साथ अब केंद्र सरकार द्वारा मत्स्य पालन के व्यवसाय करने वाले किसानों को भी आर्थिक सहयोग देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरूआत की गई है। जिसे नीली क्रांति के नाम से भी जाना जा रहा है। इस योजना के माध्यम से केंद्र के साथ-साथ कई राज्य सरकारों के द्वारा मिलकर मत्स्य पालन का व्यवसाय करने वाले किसानों को 40 से 60% सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। इसे शुरू करके किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना कृषि क्षेत्र पर केंद्रित एक अनवरत चलनेवाली विकास योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024 -25 तक सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वित किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत 20,050 करोड़ रुपए का निवेश मत्स्य क्षेत्र में होने वाला सबसे अधिक निवेश है। इसमें लगभग 12,340 करोड़ रुपए का निवेश समुद्री अंतरदेशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी केंद्रित गतिविधियों पर तथा 7,710 करोड़ रुपए का निवेश फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रस्तावित है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग के किसान, जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि मत्स्य पालन के व्यवसाय को शुरू करने के लिए उसमें अधिक पैसे खर्च कर सके, ऐसे सभी किसानों को सरकार योजना के माध्यम से 40% अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सरकार द्वारा 60% तक की सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पूरे देश में 5 वर्ष के लिए लागू किए जाने के बाद सरकार का मुख्य लक्ष्य देश में 55 लाख युवाओं के लिए रोजगार उत्पन्न करने का रखा गया है। इसके साथ ही देश में वर्ष 2018 -19 में 46589 करोड़ रुपए निर्यात आय को बढ़ाकर 2024 -25 तक एक लाख करोड़ की दुगुना निर्यात आय करके 70 लाख टन का अतिरिक्त मछली उत्पादन करना है। जिससे देश में मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने वाले किसान अपने व्यवसाय से अधिक मछली का बेहतर लाभ अर्जित कर सकेंगे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की प्रमुख बातों पर भी हमें गौर करना चाहिए। मछलियों की गुणवत्ता वाली प्रजातियों की नस्ल तैयार करने तथा उनकी विभिन्न प्रजातियां विकसित करने ,महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास और विपणन नेटवर्क आदि पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। नीली क्रांति योजना की उपलब्धियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई कार्य किये जा रहे हैं।-जिसमें मछली पकड़ने के जहाजों का बीमा, मछली पकड़ने वाले जहाजों /नावों के उन्नयन हेतु सहायता ,बायो -टॉयलेट्स, लवण छारीय में जलीय कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि स्टार्ट-अप्स, इंक्यूबेटर्स, एक्वाटिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क और उनकी सुविधाओं का विस्तार, ई ट्रेडिंग /विपणन मत्स्य प्रबंधन आदि योजना शामिल है। झारखंड में मत्स्य पालन की असीम संभावनाएं देखने को मिल रही है। झारखंड में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य में पिछले साल 2.38 लाख मैट्रिक टन मछली का उत्पादन किया गया। और आगे 2024 -25 तक 1.5 लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन करने का लक्ष्य लिया गया है। ज्ञात हो कि झारखंड के लगभग 70 फीसदी मछली का सेवन करती है। राज्य में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को मछली पालन के क्षेत्र में अवश्य आगे आना चाहिए, जिससे कि एक तरफ युवाओं को रोजगार मिल सके और दूसरी तरफ मछली व्यवसाय के क्षेत्र में वे आगे बढ़ सकें। यह कहना सही होगा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश के कृषि और किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। वैसे तो देश में किसानों की आय बढ़ाने के मुद्दे पर राजनीतिक और नीतिगत चचार्एं तो खूब होती रही है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के रूप में इस क्षेत्र में सुधार करने में सक्षम अन्य दूसरी कोई सरकार नहीं रहीं। (लेखिका प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजपा झारखंड हैं।)

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