ताजमहल में मुगल बादशाह शाहजहां ने मकराना का "सफेद मार्बल" ही क्यों लगवाया...

 

एबीएन सोशल डेस्क। दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल अपनी खास तरह की खूबसूरती के लिए जाना जाता है। ताजमहल में लगे सफेद पत्थर इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। चांद की रोशनी जब ताजमहल पर पड़ती है तो यह चमक उठता है। इसकी खूबसूरती का दीदार करने के लिए दुनियाभर से लोग आगरा पहुंचते हैं। पर आपने कभी सोचा है कि ताजमहल को बनाने के लिए सफेद मार्बल का ही इस्तेमाल क्यों किया गया है। इसे बनाने के लिए मकराना के सफेद मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। इसकी भी एक खास वजह है। ताजमहल में सफेद पत्थरों का इस्तेमाल क्यों किया गया है, इसकी क्या खास वजह है, जानिए, इन सवालों के जवाब… हिस्ट्रीहिट की रिपोर्ट कहती है, ताजमहल में इस्तेमाल हुए सफेद मार्बल का खास महत्व है। इसे जिस दौर में बनाया गया है। उस समय सफेद पत्थरों का इस्तेमाल कुछ चुनिंदा जगहों के लिए ही किया जाता था। मुगल काल में निर्माण होने वाली हर चीज की अपनी खासियत होती थी। मुगल काल में सबसे ज्यादा दो तरह के पत्थरों का इस्तेमाल किया जाता था- लाल और सफेद। लाल पत्थरों का इस्तेमाल महलों या उस दौर की इमारतों को बनाने में किया जाता था, लेकिन सफेद पत्थर का इस्तेमाल चुनिंदा जगहों के लिए ही किया जाता था। ऐसे मार्बल को पवित्र स्थानों के लिए रिजर्व रखा जाता था। इनका इस्तेमाल मकबरा, कब्र, समाधि जैसी जगहों के लिए किया जाता था। इसलिए ताजमहल के लिए सफेद मार्बल का इस्तेमाल किया गया। सुबह गुलाबी, दिन में सफेद और रात में सुनहरा दिखता है। इस मार्बल एक खासियत और भी है। वो है इनका रंग। सफेद होने के बावजूद ये मार्बल ताजमहल को अलग-अलग रंगों में दिखाता है। जैसे- अलसुबह यह गुलाबी नजर आता है। दिनभर यह सफेद दिखता है और रात में चंद्रमा की रोशनी में यह सुनहरा नजर आता है। शाहजहां ने इसलिए बनवाया ताजमहल : यूं तो शाहजहां का नाम कई महिलाओं के साथ जोड़ा गया, लेकिन वो वास्तव में सबसे ज्यादा प्यार मुमताज महल से ही करते थे। जब तक उनकी पत्नी मुमताज महल जीवित रहीं, वो पूरी तरह से उनके प्रति समर्पित थे, यहां तक कि उनकी दूसरी पत्नियों की उनके निजी जीवन में बहुत कम जगह थी। शाहजहां के दरबारी इतिहासकार इनायत खां ने अपनी किताब में लिखा है कि शाहजहां मुमताज के बगैर नहीं रह सकते थे। ताजमहल बनवाने के पीछे वो सपना था जिसे मुमताज ने देखा था। शाहजहां के गद्दी संभालने के 4 साल के अंदर मुमताज का निधन हो गया था। निधन से पहले अंतिम क्षणों में मुमताज ने बादशाह से कहा था कि उन्होंने सपने में एक ऐसा सुंदर महल और बाग देखा वैसा दुनिया में कहीं नहीं है। मेरी आपसे गुजारिश है कि आप मेरी याद में ऐसा ही एक मकबरा बनवाएं। इसके बाद ही ताजमहल की नींव पड़ी थी।

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