फिर से चर्चित घोड़े की नाल जैसे पत्थरों से बना सौर कैलेंडर कहां है...

 

एबीएन नॉलेज डेस्क। यह है ऐतिहासिक स्टोनहेंज। इंग्लैंड में इसे 5 हजार साल पहले बनाया गया था, लेकिन इसे किसने बनाया और इसे बनाने के पीछे क्या मकसद था, आज भी यह एक रहस्य ही है। इसका पता लगाने के लिए कई वैज्ञानिक सालों से रिसर्च कर रहे हैं। हालिया रिसर्च में एक नई बात सामने आई है। रिसर्च करने वाली बनेर्माउंट यूनिवर्सिटी के आॅर्कियोलॉजिस्ट प्रो टिमोथी ड्रेविल का कहना है, पत्थरों से बना यह स्टोनहेंज एक तरह का सौर कैलेंडर है। शोधकर्ताओं का कहना है, स्टोनहेंज में 15 पत्थर ऐसे हैं जो घोड़े की नाल के आकार के हैं। इन पत्थरों की बनावट अलग किस्म की है। ये एक सौर कैलेंडर की तरह काम करते हैं। यह पूरी कृति एक महीने को प्रदर्शित करती है। इसके अलावा 24 स्टोन का एक सर्किल घंटों की तरह की एक दिन को प्रदर्शित करता है। शोधकर्ताओं का कहना है, इस स्टोनहेंज का प्रयोग ऐतिहासिक कैलेंडर के तौर पर किया जाता रहा है। हालांकि, इंग्लैंड के लोगों में इसको लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि पत्थरों का यह समूह कोई मंदिर या कब्रगाह हो सकता है। वहीं, कुछ का मानना है कि यह पूजा करने का स्थान भी हो सकता है। स्टोनहेंज का ऊपरी और बाहरी हिस्सा हील स्टोन, स्लाटर स्टोन और स्टेशन स्टोन की तरह बना हुआ है। स्टोनहेंज पर इतिहासकारों का कहना है कि गर्मियों में सूर्य हील स्टोन के पीछे से पूर्व-उत्तर की तरफ उगता है। इसकी सबसे पहली किरण ही स्टोनहेंज पर पड़ती है। जबकि सर्दी मौसम में इसके बीचों-बीच सूर्यास्त होता है, जो दक्षिण-पश्चिम की ओर होता है। शोधकतार्ओं का कहना है कि स्टोनहेंज के मुताबिक, हफ्ते में 10 दिन होते हैं। यह एक खास तरह का कैलेंडर होता है। एक ऐसा सौर कैलेंडर 3,000 ईसा पूर्व के बाद पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में विकसित किया गया था। मिस्र में भी 2,700 ईसा पूर्व में इसे अपनाया।

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