एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में स्थित यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर शुक्रवार को रूस ने कब्जा कर लिया। हमले के दौरान जैपोरिझिया संयंत्र की एक इमारत में बृहस्पतिवार रात आग लग गई। ऐसे में परमाणु रेडिएशन के रिसाव के डर से यूरोपीय महाद्वीप समेत पूरी दुनिया कई घंटे सांसत में रही। हालांकि, आग को शुक्रवार सुबह बुझा दिया गया। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया है कि संयंत्र अब सामान्य रूप से काम कर रहा है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की। जैपोरिझिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र को रूसी कब्जे में जाने से बचाने के लिए यूक्रेनी सैनिकों और स्थानीय लोगों ने पूरा जोर लगाया, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। इस संयंत्र से यूक्रेन की बिजली जरूरतों के 20 फीसदी हिस्से की आपूर्ति होती है। वहीं, रूस ने आरोप लगाया कि आग यूक्रेन ने खुद लगाई है। रूस ने इसे दानवी कृत्य बताया। बाद में अधिकारियों ने बताया कि जैपोरिझिया परिसर में लगी आग दरअसल प्रशिक्षण केंद्र की इमारत में लगी थी न कि संयंत्र में। संयंत्र में धमाके से चेर्नोबिल-फुकुशिमा जैसे हादसे का डर है। आईएईए प्रमुख बोले-जितनी जल्दी हो, दौरे की अनुमति दें : रेडिएशन के रिसाव के खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए ) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने रूस और यूक्रेन दोनों से कहा है कि जितनी जल्दी हो सके उन्हें वहां जाने दिया जाए। उन्होंने कहा, संयंत्र की भौतिक स्थिति संकट में है। जेलेंस्की की भावुक अपील : अब तो जागो- यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने वीडियो संदेश में कहा, यूरोपवासियो, कृपया जागो। अपने नेताओं से कहो कि रूसी सैनिक यूक्रेन के परमाणु संयंत्रों पर गोलियां बरसा रहे हैं। एक अन्य संदेश में उन्होंने रूसी लोगों से विद्रोह करने के लिए कहा। चेर्निहीव पर हमला, 47 की मौत, बंदरगाह शहर माइकोलेइव पर कब्जे की कोशिश नाकाम रूस ने चेर्निहीव पर जोरदार हवाई हमला बोला, जिसमें 47 लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया, रूस ने बृहस्पतिवार को एक नागरिक ठिकाने पर हवाई हमला किया। वहीं, बंदरगाह शहर माइकोलेइव पर कब्जे की रूसी कोशिश यूक्रेन ने नाकाम कर दी है। पांच लाख आबादी वाले इस शहर में भीषण लड़ाई जारी है। कीव, खारकीव पर बमबारी जारी है, मगर इनमें से किसी शहर पर अब तक रूस कब्जा नहीं कर पाया है। मैरियूपोल का घेरा भी बना हुआ है और यूक्रेनी शहर को अब तक बचाने में कामयाब हैं। अमेरिका ने उपग्रह चित्रों के आधार पर दावा किया कि रूसी सेना कीव से अब 25 किमी दूर है। वार्ता के बारे में जानकारी देने से इनकार : यूक्रेन और रूस के बीच वार्ता का दूसरा दौर नागरिकों के लिए सुरक्षित गलियारा बनाने तक सीमित रहा। हालांकि, युद्ध रोकने व अन्य बिंदुओं पर कोई जानकारी देने से दोनों ही पक्षों ने इनकार कर दिया है। जेलेंस्की कहां हैं...: रूसी संसद ड्यूमा के अध्यक्ष वेचेस्लाव वोलोदिन ने कहा, राष्ट्रपति जेलेंस्की देश छोड़कर पोलैंड चले गए हैं। वहीं, यूक्रेन ने दावा किया कि जेलेंस्की ने देश नहीं छोड़ा है। वोलोदिन ने कहा, जेलेंस्की अब यूक्रेन में नहीं हैं। यूक्रेन की सुप्रीम काउंसिल वेरखोवना राडा के उनके सहयोगियों का कहना है कि लवीव में उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा। जेलेंस्की ने कहा था, वह देश नहीं छोड़ेंगे। हालांकि, अमेरिका ने उनकी सुरक्षा को लेकर देश छोड़नेे का आग्रह किया था। रूस में फेसबुक, बीबीसी समेत कई वेबसाइटों पर प्रतिबंध मास्को। रूसी टीवी चैनल व समाचार एजेंसियों पर यूरोप, अमेरिकी प्रतिबंध के बाद मास्को ने भी पलटवार किया है। यूक्रेन पर हमले को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए रूस ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक के साथ बीबीसी व डायचे वैले समेत कुछ पश्चिमी समाचार पोर्टलों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच, रूसी संसद ने "फर्जी" खबरों पर सजा देने के लिए सख्त कानून बनाया है। इसके तहत सेना के खिलाफ गलत सूचनाएं देने वालों को 15 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। जानकारों का कहना है कि इसका सीधा निशाना पश्चिमी मीडिया बनेगा। इसके अलावा मीडिया नियामक संस्थान रोस्कोमनाडजोर ने फेसबुक को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है। ट्रंप के करीबी सीनेटर ग्राहम बोले, पुतिन की हत्या से ही होगा दुनिया का भला : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दुनिया के भले के लिए राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की हत्या करने को कहा है। अपने सैनिक ब्रूटस के हाथों मारे गए क्रूर रोमन जनरल जूलियस सीजर और हिटलर की हत्या का प्रयास करने वाले कर्नल स्टॉफेनबर्ग की मिसाल देते हुए ग्राहम ने कहा, क्या रूस की सेना में कोई ब्रूटस या कर्नल स्टॉफेनबर्ग है। क्योंकि, अभी जो चल रहा है, उसका अंत इसी तरीके से हो सकता है। दुनिया में सदी का सबसे तेज शरणार्थी पलायन : जंग शुरू होने के हफ्तेभर में ही 12 लाख से ज्यादा लोगों ने यूरोप समेत दूसरे देशों में शरण ली है। करीब 55 फीसदी लोगों ने अकेले पोलैंड का रुख किया है तो सबसे कम बेलारूस में गए हैं। दुनिया में यह शरणार्थियों का इस सदी का सबसे तेज कूच माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक अब तक करीब 12 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर बाहर जा चुके हैं। यूरोप ने तीन दशकों में इतना बड़ा प्रवासी संकट नहीं देखा है, जिसका असर आने वाले कई वर्षों तक रहेगा। संयुक्त राष्ट्र यूक्रेन जंग के दौरान 40 लाख से ज्यादा लोगों के शरणार्थी बनने के आसार जता चुका है। यानी आगामी हफ्तों में अभी 30 लाख और यूक्रेनी दूसरे देशों में जाएंगे।
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