टीम एबीएन, पटना। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बिहार सरकार को एक नोटिस भेजा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि यह नोटिस राज्य के 38 में से 31 जिलों में भूजल के रसायनों से दूषित होने की रिपोर्ट्स पर जारी किया गया है। एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि हमने इस संबंध में एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया गया है। इस रिपोर्ट में बिहार आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2021-22 का हवाला दिया गया है जिसको हाल ही में राज्य विधानसभा में पेश की गई है। आयोग ने कहा है कि अगर इस मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है। इसने मुख्य सचिव व सचिव, सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग और बिहार सरकार को नोटिस भेजा है। इस नोटिस पर छह सप्ताह के अंदर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 38 में से 31 जिलों में भूजल आर्सेनिक, फ्लोराइड और अधिक आयरन से दूषित है। इनसे लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। 31 जिलों में भूजल प्रदूषण की स्थिति बहुत गंभीर : रिपोर्ट के अनुसार इस दूषित भूजल की वजह से लोग लिवर और किडनी से संबंधित गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य के 31 जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण की स्थिति अधिक गंभीर हैं। ऐसे जिलों में पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए उठाए गए सुरक्षा उपाय और "हर घर नल-जल" योजना के तहत मानकों को लागू करने की मांग भी की गई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी रैंडम सैंपलिंग पर रिपोर्ट मांगी गई है। तीन मार्च को प्रकाशित हुई इस मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 30,272 ग्रामीण वार्ड में भूजल रसायनों से दूषित है। 14 जिलों के 4742 वार्ड गंगा नदी के तट पर बसे हुए हैं और यहां पर भूजल मुख्य रूप से आर्सेनिक से दूषित है।
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