एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक में हिजाब विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिजाब वाली छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश नहीं देने और घर वापस भेजने को पर एक जूनियर कॉलेज प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी दी गई है। मदिकेरी जिला पुलिस ने इस मामले में प्रिंसिपल विजय की शिकायत पर मोहम्मद तौसीफ नामक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है। उधर, पुलिस और प्रशासन ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और प्रशासनिक समझाइश के बावजूद धरना-प्रदर्शन करने माहौल खराब करने वालों पर भी सख्ती शुरू कर दी है। जहां, तुमकुर में गुरुवार को प्रदर्शन में शामिल 15 छात्राओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, शिवमोग्गा जिले में एक प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की 58 छात्राओं को विरोध-प्रदर्शन करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक पुलिस ने हिजाब को लेकर पारित अंतरिम आदेश और सीआरपीसी की धारा-144 के तहत जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में शनिवार को कम से कम 10 लड़कियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 145, 188 और 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। छात्राओं ने तुमकुर में गर्ल्स एम्प्रेस गवर्नमेंट पीयू कॉलेज के बाहर गुरुवार, 17 फरवरी को प्रदर्शन किया था। इन छात्राओं पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। दक्षिण कन्नड़ जिले में स्कूल कॉलेजों के आसपास प्रतिबंध 26 तक बढ़ा : हालात को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने स्कूल व कॉलेजों के आस पास लगाए गए प्रतिबंध को 26 फरवरी तक बढ़ा दिया है। उपायुक्त केवी राजेंद्र ने कहा, हिजाब विवाद के तनाव को देखते हुए शनिवार शाम 6 बजे से 26 फरवरी शाम 6 बजे तक स्कूल कॉलेज के 200 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू रहेंगे। बाहरी लोग विवाद भड़का रहे: बोम्मई : मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने कहा, यह सारा विवाद बाहरी लोग भड़का रहे हैं। प्रधानाचार्य, छात्राओं और उनके अभिभावकों द्वारा इस मुद्दे का समाधान निकाल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि माहौल शांत रखा जाए। मगर कुछ लोग ऐसा होने नहीं दे रहे। छात्राओं ने रोक के बावजूद किया था प्रदर्शन : हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई अभी लंबित है और अंतरिम आदेश के अनुसार, कक्षाओं में छात्र-छात्राओं के हिजाब, बुर्का और भगवा गमछे आदि पहनने पर रोक लगी है। इसके बावजूद कई छात्राएं लगातार हिजाब पहनने पर अड़ी हुई हैं। गुरुवार को भी जब छात्राओं को हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिजाब नहीं उतारने पर कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिया गया तो छात्राएं प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के बाहर ही धरने पर बैठ गई और रोक के बावजूद प्रदर्शन व नारेबाजी शुरू कर दी थी। हाईकोर्ट में दलील- हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं : वहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि हिजाब इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा यानी अनिवार्य नहीं है और इसके उपयोग को रोकना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25, जो कि धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं, मुस्लिम लड़कियों की ओर से पेश वकील विनोद कुलकर्णी ने याचिका में कहा है कि हिजाब पर प्रतिबंध पवित्र कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा है।
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