एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक बार फिर चीन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चीन समझौतों का उल्लंघन कर सीमा पर बार-बार भारत के लिए चुनौती पेश कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सीमा के मौजूदा हालातों पर यह संबंध पर निर्भर करेंगे। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे विदेश मंत्री ने यहां आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने भारत-चीन सीमा तनाव पर वैश्विक मंच के समक्ष अपनी बात रखते हुए गलवान घाटी में हुए संघर्ष की याद भी दिलाई। बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं संबंध : विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि समस्या यह है कि 45 साल तक सीमा पर शांति रही, सीमा प्रबंधन स्थिर था, 1975 से सीमा पर कोई जवान हताहत नहीं हुआ था। परंतु अब यह बदल गया है। चीन के साथ वास्तविक सीमा रेखा पर कम से कम सैन्य बलों की तैनाती को लेकर भारत ने समझौते किए थे। लेकिन चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया। साफ है चीन के साथ हमारे संबंध बहुत कठिन दौर में हैं। जयशंकर यहां भारत-चीन सीमा तनाव और पश्चिम की ओर भारत के रुख में निर्णायक बदलाव को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंध बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं और जून 2020 से पहले भी पश्चिम के साथ संबंध काफी अच्छे थे, इसलिए जहां तक पश्चिम के साथ अच्छे संबंधों का संबंध है, तो इसके पीछे वह कोई कारण नहीं और ना ही उसने इन्हें प्रभावत किया है। उल्लेखनीय है कि जून 2020 में गलवान घाटी में चीन ने वास्तविक सीमा रेखा का उल्लंघन करते हुए भारतीय सैनिकों पर हमला बोला था। इस हिंसक झड़प में कई सैनिकों ने अपनी जान गवां दी थी। हालांकि कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन के ज्यादा सैनिकों की मौत हुई। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ गया था। गलवान संघर्ष के बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता भी हुई, लेकिन अभी तक इसका उचित हल नहीं निकला है।
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