टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। रास्ता, हवा और पानी किसी भी व्यक्ति के लिए बंद नहीं किया जा सकता। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने प्रार्थी गीता देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें घर तक जाने का रास्ता उपलब्ध कराने और सोमवार को पूर्व की स्थिति बहाल करने का निर्देश जिला प्रशासन और एसएसपी के दिया है। अदालत ने कहा है कि अदालत इस मामले में टाइटल तय नहीं कर रहा है। टाइटल तय करने के लिए दोनों पक्ष सक्षम न्यायालय में जा सकते हैं। लेकिन जब तक टाइटल डिसाइड नहीं हो जाता, तब तक किसी का रास्ता अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसा करना मौलिक अधिकार का हनन है। गीता देवी ने अपनी याचिका में कहा है कि वह हिनू की निवासी है। कुछ लोगों ने उनके घर का रास्ता बंद कर दिया है। स्थानीय लोगों ने जिस जमीन पर दीवार खड़ी कर रास्ता बंद किया है, वह आम रास्ता था, लेकिन उसे सरना की जमीन बताकर वहां बाउंड्री वॉल खड़ा कर दिया गया, जिससे उनके घर का रास्ता बंद हो गया है।
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