एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन मसले पर रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले साहसी रुख दिखा रहा हो, लेकिन युद्ध की स्थिति में पश्चिमी देशों की तरफ से लगने वाले प्रतिबंधों को लेकर देश के अंदर गहरी चिंता है। रूस सरकार और देश के बड़े कारोबारी बीते कई हफ्तों से पश्चिमी प्रतिबंधों के असर से बचने के तरीकों पर विचार करते रहे हैं। इस सिलसिले में क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) ने यह जानने के लिए कई अध्ययन कराए हैं कि पश्चिमी प्रतिबंधों का रूस के उद्योगों पर क्या असर पड़ेगा। पश्चिमी देशों ने चेतावनी दे रखी है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो रूसी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से अलग कर दिया जाएगा। स्विफ्ट नाम से जाने वाली इस प्रणाली के जरिए ही अंतरराष्ट्रीय भुगतान का सारा काम होता है। पश्चिम की इस धमकी को रूस में बेहद गंभीरता से लिया गया है। सोवकोमबैंक पर लटक सकती है प्रतिबंध की तलवार : यहां से प्रकाशित अखबार द मास्को टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध और संभावित प्रतिबंधों की आशंका से रूस का कारोबार जगत आशंकित है। रूस की निजी कर्जदाता एजेंसी सोवकोमबैंक के संस्थापक सर्गेई खोतिम्स्की ने कहा- अभी ऐसा लगता है कि हमारे सिर पर किसी ने बंदूक तान रखी है और उसके साये में हम काम कर रहे हैं। अमेरिका ने जिन रूसी वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है, उनमें सोवकोमबैंक भी है। रूसी अखबार कोमेरसांत के मुताबिक जिन बैंकोंम करने के तरीकों पर सोच-विचार किया गया है, उनमें सरकारी बैंक स्बेरबैंक भी है। रूसी बैंकों में भी माइक्रोसॉफ्ट और एसएपी जैसे अमेरिका में बने सॉफ्टवेयर्स का ही इस्तेमाल होता है। इसके मुताबिक रूसी बैंक और कंपनियां इस बारे में स्विफ्ट सिस्टम के बिना कामें सार्वजनिक रूप से भले कुछ ना कह रही हों, लेकिन अंदर ही अंदर उनमें गहरी चिंता फैली हुई है। उनके अधिकारी इस बात से वाकिफ हैं कि उनके यहां बड़े पैमाने पर अमेरिका में निर्मित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है। युद्ध की स्थिति में अमेरिकी कंपनियां इन्हें जाम कर दे सकती हैं। कारोबार ठप होने की चिंता : कारोबार से जुड़ी संस्था कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर सब्सिट्यूशन फॉर इंपोर्ट की प्रमुख इल्या मासुख ने कहा- सूचना तकनीक का इस्तेमाल देशों पर दबाव बनाने और अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है। मसलन, एरोफ्लोट पर ध्यान दीजिए। इस कंपनी पर जो सबसे हानिकारक प्रहार हो सकता है, उसका संबंध तकनीक से है। इसके विमानों को हवाई अड्डों पर ही पड़े रहने के लिए मजबूर किया जा सकता है, क्योंकि बिना एसएपी और ऑरेकल के वे उड़ान नहीं भर सकते। विशेषज्ञों ने बताया है कि रूस की सरकारी कंपनियों में जितने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है, उनमें सिर्फ एक तिहाई ही देश के अंदर बने हुए हैं। एरोफ्लोट, वीटीबी बैंक, और ट्रांसनेफ्ट जैसी कंपनियों में तो सिर्फ दस फीसदी देसी सॉफ्टवेयर का उपयोग होता है। ऐसे में अगर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तो रूस में कारोबार का बहुत बड़ा हिस्सा ठप हो जाएगा। ये चिंता रूस सरकार को भी सता रही है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि शायद इसी वजह से वह अब तनाव घटाने के संकेत दे रही है।
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