टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के हिनू में रास्ता रोकने के मामले में दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी किसी व्यक्ति का हवा, पानी और रास्ता रोका नहीं सकता है। यह मौलिक अधिकार है मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता। अदालत ने रांची जिला प्रशासन और एसएसपी को निर्देश दिया है कि वो बाउंड्री हटवाकर 21 फरवरी तक रास्ता दिलाएं और कोर्ट को इससे अवगत कराएं। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ स्थानीय लोगों ने उनके घर के सामने के रास्ते को बंद कर दिया है जबकि वह आम रास्ता था, लेकिन उसे सरना स्थल का जमीन बताते हुए उसकी घेराबंदी कर दी गयी, जिससे रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि उन्हें रास्ता दिलाया जाए। इस पर अदालत ने कहा कि यहां टाइटल डिसाइड नहीं किया जा सकता है। दोनों ही पक्ष सक्षम न्यायालय में टाइटल में जाने को स्वतंत्र हैं, लेकिन जब तक टाइटल डिसाइड नहीं होता तब तक किसी का रास्ता रोका नहीं जा सकता है। क्योंकि यह मौलिक अधिकार है और मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है। यहां बता दें कि रांची हिनू की गीता देवी के घर का रास्ता स्थानीय लोगों ने घेराबंदी करके बंद कर दिया है। उसी रास्ता को खुलवाने की मांग को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उसी याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने रांची जिला प्रशासन और रांची एसएसपी को रास्ता दिलाने का निर्देश दिया है।
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