टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पिछले दो दिनों से बिजली संकट गहराया हुआ है। राजधानी रांची समेत राज्य के प्रमुख शहरों में दो से तीन घंटे की लोड शेडिंग की जा रही है। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में किस्तों में चार घंटे से अधिक कटौती की मार पड़ने लगी है। रांची में खासतौर पर किस्तों में व्यस्त समय सुबह सात से नौ और शाम छह से आठ बजे के दौरान बिजली कटौती से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। झारखंड में बिजली संकट की यह स्थिति केंद्रीय आवंटन से मिलने वाली बिजली में 200 से 250 मेगावाट की कमी और इनलैंड पावर से 50 मेगावाट की आपूर्ति नहीं होने से बनी है। राज्य में बुधवार को मांग की तुलना में 300 से 350 मेगावाट बिजली की उपलब्धता कम रही। झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) की ओर से इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली प्रबंधन का प्रयास किया जा रहा है। राज्य में बिजली की मांग करीब 1700 मेगावाट पहुंच रही है, लेकिन आपूर्ति करीब 1300 मेगावाट हो पा रही है। झारखंड बिजली वितरण निगम को एनटीपीसी से प्रतिदिन करीब 800 मेगावाट बिजली मिलती है। यह दो दिन से 550 से 600 मेगावाट तक हो पा रही है। राज्य को यह केंद्रीय आवंटन एनटीपीसी की फरक्का, डर्लीपर्ली और बाढ़ यूनिटों में उत्पादन प्रभावित होने के कारण घटा है। दूसरी ओर गोला स्थित इनलैंड पावर में मंगलवार को तकनीकी कारणों से उत्पादन प्रभावित हो गया। इससे राज्य को 50 मेगावाट बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इन कारणों से राज्य में बिजली संकट गहरा गया है। इनलैंड पावर से राज्य को बिजली आपूर्ति बहाल होने में दो दिन लग सकता है। उम्मीद की जा रही है पतरातू में स्थापित हो रहे थर्मल पावर प्लांट की पहली यूनिट से अगले वर्ष उत्पादन शुरू हो सकेगा। पहले चरण में यहां 800 मेगावाट की तीन इकाइयां स्थापित हो रही हैं। इस प्लांट से उत्पादन शुरू होने पर चरणबद्ध तरीके से झारखंड को जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध होने लगेगी।
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