टीम एबीएन, रांची। केन्द्रीय हिंदी निदेशालय नई दिल्ली और राजेंद्र विश्वविद्यालय, बलांगीर (ओडिशा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय नव लेखन शिविर में आज कविता पर विमर्श हुआ।संसाधन सेवी के रूप में बोलते हुए रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जे बी पाण्डेय ने कहा कि कविता मनुष्यता की उच्च भूमि है। उन्होंने आचार्य मम्मट, आचार्य विश्वनाथ और पंडित राज जगन्नाथ की काव्य संबंधी परिभाषाओं की विस्तृत व्याख्या की और कहा काव्य रसात्मक और भावात्मक सरस भावाभिव्यक्ति है। उन्होंने आचार्य रामचंद्र शुक्ल की परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी परिभाषा बहुत सार्थक और व्यापक है। जिस प्रकार आत्मा की मुक्ता अवस्था ज्ञान दशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्ता अवस्था रसदशा कहलाती है, हृदय की इसी मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आई है, उसे कविता कहते हैं। इस साधना को हम भावयोग कहते हैं और कर्मयोग और ज्ञान योग के समक्ष मानते हैं। कविता की व्याख्या करते हुए डा पाण्डेय ने कहा कि कविता में तीन वर्णों का योग है : क-कल्पना। वि-विचार। ता-तालमेल कविता कल्पना और विचार का समानुपातिक भावाभिव्यक्ति है।कविता ही मनुष्य को स्वार्थ संबधों से ऊपर ले जाती हैऔर लोक की सामान्य भूमि पर पहुचाती हैं। कविता मनुष्यता की उच्च भूमि है। डॉ जेके शर्मा ने कविता महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कविता मनुष्य का संस्कार करती है और दानव को मानव और मानव को देव बनाती है।डा सीमा असीम सक्सेना ने अपनी कविताओं से समा बांध दिया : भोली चिडिय़ा ही हूँ, मेरे पंख भी हैं। एक पिंजरा भी है, और फुदकती भी हूँ। आज के अन्य सत्रों में प्रशिक्षुओं ने अपनी कविताएं सुनाई, जिनमें अशोक कुमार प्रमाणिक आशिक, दयानंद राय, राम कुमार प्रसाद, लाल मोहन महतो, उमा शंकर महतो, अंगद प्रमाणिक, प्रियंका कुमारी, आरती कुमारी, स्वरूपा सिंह, क्षेत्र मणि बिसार नूतन सत्पथी, अभिषेक कुमार सिंह, भल्टी खमारी, स्वरूप सिंह आदि प्रमुख हैं। इनकी कविताओं पर प्रतिभागियों ने प्रतिक्रियाएं भी दी। डॉ शैलेश बिडालिया ने कविता के स्वरूप और आवश्यकता पर प्रकाश डाला और नवांकुरों को कविता लेखन के लिए प्रोत्साहित किया।सरस्वती वंदना सुश्री स्वरूपा सिंह ने संचालन और आगत अतिथियों का स्वागत संयोजक डॉ संजय कुमार सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन विनोद शर्मा ने किया। राष्ट्र गान से शिविर का समापन 4 बजे हुआ।
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