टीम एबीएन, सिमडेगा। झारखंड में सिमडेगा स्थित केलाघाघ, दनगद्दी, केतुंगाधाम जैसे पर्यटक स्थलों को दिया गया नया स्वरूप ना सिर्फ पर्यटकों को अपनी ओर बरबस आकर्षित कर रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका भी सशक्त हो रही है। यहां की मनोरम प्रकृति छटा पर्यटकों का मन मोह रही है। यही नहीं, इन पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं से आच्छादित किया गया है, जिससे पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। सिमडेगा के उपायुक्त सुशांत गौरव ने सोमवार को बताया कि वर्षों से उपेक्षित सिमडेगा के पर्यटन स्थलों को संवारने का कार्य पिछले एक वर्ष से किया जा रहा है। जिला पर्यटन संर्वधन समिति के माध्यम से जिले के वैसे पर्यटक स्थल, जहां पर्यटकों का आना लगा रहता है, उसे चिह्नित करते हुए विकास के कार्य हो रहे हैं। इस कार्य में स्थानीय लोगों की भूमिका तय की गई, जिसे यहां के लोगों ने सहर्ष स्वीकार भी किया है। इससे जिला प्रशासन को सहूलियत हुई और पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण एवं लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार सुनिश्चित हुआ। सिमडेगा में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। इनमें से एक है। भंवर पहाड़, जो पौराणिक विरासत का प्रतीक है। कहते हैं कि कालांतर में युद्ध के दौरान शत्रुओं को मार गिराने में भंवर पहाड़ का अहम योगदान रहा है। जिला प्रशासन द्वारा भंवर पहाड़ की विरासत तथा पहाड़़ को पर्यटक स्थल के रूप में पहचान दिलाने के लिए चिह्नित किया। भंवर पहाड़़ के मनोरम द्दश्य को देखने एवं पहाड़़ की खासियत से जन-जन को अवगत कराने के उदेश्य से उसे सँवारने का कार्य धरातल पर उतारा गया है। जल्द भंवर पहाड़़ के सौंदर्यीकरण के कार्य को पूर्ण करते हुए पर्यटकों को सुपुर्द कर दिया जायेगा।
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