टीम एबीएन, रांची। प्राचार्य विनोद पांडेय ने अपने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा संन्यासी मुक्तरथ जी को न केवल एक संन्यासी के रूप में बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हमलोगों को देखना चाहिए। आचार्य मुक्तरथ व्यक्ति के व्यावहारिक बीमारी का पता करते हैं और उनका समाधान करते हैं। मानसिक बिमारियों का लक्षण तो व्यवहार से ही परिलक्षित होता है। इनके सहयोग से हम अपने छात्रों को काफी आगे बढ़ा सकते हैं। हमें हर दिन अपने प्रति सजग होना चाहिये जो हमें योग सिखाता है। स्वामी मुक्तरथ जी को सम्मानित करते मुझे बहुत गौरव हो रहा है कि मैं समाज के उन व्यक्ति को सम्मानित कर रहा हूँ जिनका सामाजिक उत्थान और देश के विकाश में महत्वपूर्ण योगदान है। योग और अध्यात्म ही हमें सामाजिक और नैतिक बना सकता है। आचार्य मुक्तरथ ने शिक्षकों का आवाहन करते हुए कहा कि हम शिक्षक ही बच्चों की छुपी प्रतिभा को पहचान सकते हैं और उस अनुरूप उनके जीवन चरित्र का निर्माण कर सकते हैं। वर्तमान समय में जिस हिसाब से एंजाइटी और डिप्रेशन बढ़ रहा है उसे योग ही रोक सकता है।आन्तरिक प्रतिभा को उजागर करने और विकसित करने में योग बहुत कारगर है। 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस पर डीएवी हेहल के प्राचार्य एमके सिन्हा भी स्वामी मुक्तरथ को सम्मानित कर चुके हैं।
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