देश-दुनिया के संपर्क से कटकर तीन महीने में अधिकारी बनाते हैं देश का बजट

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2021 पेश की हैं। आपने कभी सोचा है कि आखिर सरकार पूरे साल का बजट कैसे तैयार करती है? देश के हर राज्य और हर मंत्रालय की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है आमतौर पर बजट तैयार करने की प्रक्रिया 5 महीने पहले से ही शुरू हो जाती है और कई अहम बैठकों के बाद इसे तैयार किया जाता है। पढ़ें बजट तैयार करने की प्रक्रिया, क्या-क्या होता है बजट में। बजट तैयार करने की प्रक्रिया : बजट पेश होने के 5 महीने पहले सितंबर में आर्थिक मामलों के विभाग की बजट डिविजन सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्कुलर जारी करती है। इसमें उनसे आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए उनके खर्चों का अनुमान लगाते हुए जरूरी फंड बताने के लिए कहा जाता है। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में वित्त मंत्रालय दूसरे मंत्रालयों-विभागों के अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हैं और ये तय करते हैं कि किस मंत्रालय या विभाग को कितनी रकम दी जाए। मीटिंग में तय होने के बाद एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। सबकुछ तय होने के बाद बजट डॉक्यूमेंट की छपाई होती है लेकिन इस बार छपाई नहीं होगी। बजट पेश होने से करीब एक हफ्ते पहले वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी होती है। इसके बाद सभी संबंधित अधिकारियों को वित्त मंत्रालय में ही ठहराया जाता है और किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं करने दिया जाता। जब बजट पेश हो जाता है, तभी अधिकारियों को बाहर आने दिया जाता है। दफ्तर में ही गुजरती है अधिकारियों की रात : दरअसल बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को तीन महीने के काफी गोपनीय रखा जाता है। बजट प्रक्रिया को गोपनीय रखने के लिए उनका संपर्क पूरी दुनिया से कटा रहता है। बजट के अंतिम समय में तो उनके मोबाइल रखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है। ऐसे में इस दौरान नॉर्थ ब्लॉक के आसपास बिना कारण घूमना भी खतरे से खाली नहीं होता है. बजट बनाने के लिए वित्त मंत्रालय के अधिकारी दिन रात मेहनत करते हैं। यह काम इतना बड़ा होता है कि उनके लिए परिवार के लिए समय निकालना भी मुश्किल होता है। फरवरी के तीसरे सप्ताह तक बजट बन कर लगभग पूरा हो जाता है। इसे नॉर्थ ब्लॉक के उस कमरे में रखा जाता है जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। बजट से एक दिन पहले आता है आर्थिक सर्वे : बजट पेश होने के ठीक एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे को पेश किया जाता है। हालांकि, इस बार इकोनॉमिक सर्वे बजट से दो दिन पहले 29 जनवरी को पेश हो गया। इकोनॉमिक सर्वे यानी आर्थिक सर्वेक्षण में बीते साल का लेखा-जोखा और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान होते हैं। इकोनॉमिक सर्वे को आर्थिक मामलों के विभाग की इकोनॉमिक डिवीजन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर यानी CEA की देख-रेख में तैयार करती है। इस वक्त CEA डॉक्टर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम हैं। पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था। 1964 तक इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था लेकिन बाद में इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा। बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी : संसद में बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाता है और उसके बाद संसद के दोनों सदनों में इसे पेश किया जाता है। बजट पेश होने के बाद क्या होता है? बजट पेश होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना होता है। दोनों सदनों से पास होने के बाद 1 अप्रैल से ये लागू हो जाता है। हमारे देश में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

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