टीम एबीएन, रांची। मोरहाबादी से फुटपाथ दुकानदारों को अचानक हटाए जाने के फैसले से सांसद संजय सेठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। सांसद श्री सेठ ने कहा की मोरहाबादी जैसे वीआईपी इलाके में गैंगवार हो जाता है। प्रशासनिक महकमा सोया रहता है और इसे रोकने के लिए कोई कदम उठाने के बजाय वहां के सैकड़ों दुकानदारों को ही सरकार हटाने का फरमान जारी करती है। यह किसी भी तरीके से सरकार का न्याय संगत कदम नहीं है। सांसद ने कहा कि यदि अपराधियों के बीच गैंगवार हुआ है तो मोरहाबादी की सुरक्षा और बढ़ानी चाहिए। वहां आने-जाने वालों पर नजर रखनी चाहिए परंतु रातों-रात इस तरह से फरमान जारी करना सैकड़ों दुकानदारों के साथ नाइंसाफी है। सरकार उनके पेट पर लात मारने का काम कर रही है। मोरहाबादी रांची की एक ऐसा जगह है, जहां से पूरे रांची के लोग जुड़े हुए हैं। चाहे सुबह मॉर्निंग वॉक करने जाना हो या शाम को परिवारों के साथ समय व्यतीत करने। वहां दो दो बड़े ऐसे पार्क हैं, जहां लोग शाम में घूमना फिरना पसंद करते हैं। इन्हीं लोगों के कारण वहां सैकड़ों दुकानें चल रही है। कई ऐसी दुकानें हैं, जहां निम्न वर्गीय परिवार के लोग दोपहर का खाना खा सकते हैं। शाम का खाना खा सकते हैं। अचानक से दुकान में बंद करने के फरमान से दुकानदारों का परिवार तो प्रभावित हुआ है, साथ ही निम्न वर्ग के लोग भी प्रभावित हुए हैं, जिनकी दाल रोटी वहां से चलती थी। जिन्हें वहां कम कीमत पर भोजन मिल जाता था। जो वहां चाय पीने आते थे। कई सकारात्मक बातें होती थी। कई परिवार के लोग वहां घूमने आते थे। श्री सेठ ने कहा कि राज्य की सरकार अपराध और नक्सलवाद को नियंत्रण करने में पूरी तरह से विफल रही है। यह एक कड़वी सच्चाई है। जिसे सरकार में बैठे लोगों को स्वीकारना चाहिए और राज्य की जनता पूरी तरह सुरक्षित हो इसकी चिंता करनी चाहिए। गांव से असुरक्षा की उठी लहर अब राजधानी में पहुंच चुकी है। राजधानी के भी ह्रदय स्थल मोरहाबादी में। ऐसी परिस्थिति में सरकार को कड़े निर्णय लेने चाहिए। अपराध पर नियंत्रण करना चाहिए परंतु यह सरकार उल्टे ही चल चल रही है। अपराध नियंत्रण हो नहीं पा रहा है तो दुकानदारों को ही हटा दे रही है। यह आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि यदि यही रवैया रहा तो कल को यह सरकार झारखंड के लोगों से कहेगी कि आप अपने घरों से मत निकलो। घरों से निकलने पर बैन लगा देगी ताकि अपराध नियंत्रण में हो जाए। उन्होंने कहा कि आंखें बंद कर लेने से अपराध नियंत्रण में नहीं होता और हम सुरक्षित नहीं हो सकते। हम सुरक्षित होंगे कड़े प्रशासनिक कदम से। अपराधियों नक्सलियों पर अंकुश लगाने से और नागरिकों को सुरक्षा देने से। यह कैसी सरकार है जो नागरिकों में सुरक्षा देने के बजाय सुरक्षा का भाव जगाने के बजाय उन्हें और दहशत में डाल रही है। निश्चित रूप से सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए और राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा का बंदोबस्त करना चाहिए। अपराधियों पर नियंत्रण लगाना चाहिए और मोरहाबादी जैसे हाई सिक्योरिटी जोन के इलाके की सुरक्षा और सुनिश्चित करना चाहिए।
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