पता नहीं कितने लोगों को स्वीकार्य होगी सीएम योगी की ये उपलब्धि...

 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (मनोज शर्मा)। यूपी में बारी-बारी से सपा या बसपा की सरकारें भी दशकों से 2017 तक आती रही। उस दरम्यान यूपी की छवि में कोई बदलाव नहीं आया। पूरे देश का जनमानस यूपी को लेकर वही जड़ उदासीन रहता था। सपा सत्ता में आती थी और उसके गिने चुने वही माफिया, अतीक मुख्तार, आजम खान अपना वर्चस्व दिखाते थे। मुस्लिम तुष्टिकरण, बहुसंख्यकों का मानमर्दन, चिर प्रतिद्वंद्वी बसपा समर्थको को ठिकाने लगाने और विकास के नाम पर सैफई महोत्सव का काम चलता था। बसपा आती थी तो सिर्फ सत्ता का ब्रांड बदलता था। धंधा वही रहता। दलित शौर्य के नाम पर सरकारी खजाने से हाथी की मूर्ति और सरकारी वसूली, कमाई , रंगदारी और विरोधियों को ठिकाने लगाने और मायावती का बर्थडे का काम जारी रहता था। एक बार बसपा के उपद्रवियों ने रीता बहुगुणा जोशी के घर में आग लगा दी थी। तत्काल इसके बाद उपद्रवियों के नेतृत्वकर्ता इंतजार आब्दी को यूपी गन्ना बोर्ड का निदेशक बना कर मायावती ने पुरस्कृत किया था। इसमें कोई संशय नहीं कि सपा और बसपा सुप्रीमो ने अकूत दौलत भी कमाई। यूपी के विकास का कोई बड़ा काम नहीं हुआ। यूपी बीमारू राज्य ही रहा। झारखंड-बिहार की तरह यूपी भी मजदूर सप्लाई करने वाला राज्य बना रहा। 2017 में योगी के आने के बाद बदलाव तो हुआ। अपराध पर एक हद तक नियंत्रण भी दिख। एयरपोर्ट, सड़कें बनीं। निवेश और उद्योग का पुरजोर प्रयास हुआ। यूपी में तुष्टिकरण और वोट के कारण आपराधिक तत्वों को जो छूट मिली थी, उसे कुंद किया गया। सबसे बड़ी बात कि योगी ने यूपी की बहुसंख्यक जनता के हारे हुये मानस को फिर से चार्ज किया। वरना इसी यूपी में पाकिस्तान की जीत पर पाक की जर्सी में युवा सड़क पर जश्न मनाते थे। यूपी में रह रहे कश्मीरी छात्र पाक की हार पर तोड़-फोड़ करते थे और मुलायम अखिलेश इसका बचाव करते थे। योगी राज में बहुत कुछ एक झटके में बदला। यूपी एक तरह से खुद को बीमारू राज्य के चोले को उतार फेंकने की राह पर है। कोरोना के समय का एक आंकड़ा है कि सबसे बड़ी, घनी आबादी और अधूरी चिकित्सा सुविधा वाला यूपी अन्य सक्षम राज्यों से ज्यादा सफलतापूर्वक महामारी से निबटने में कामयाब रहा। योगी को धन दौलत नहीं चाहिये। वो अकूत धन का क्या करेंगे? योगी में अखिलेश और माया कुनबे की तरह कोई माया नहीं। आप खुद सोचिये तो 2017 के बाद के यूपी की एक अलग छवि बनती है । योगी इस बार फिर सत्तासीन होंगे या नहीं, ये मैं नहीं जानता। पर उनका विजयी होना यूपी के लिये अच्छा होगा। क्योंकि वो धन दौलत, पारिवारिक माया-मोह से निर्लिप्त है़। उनका लक्ष्य सिर्फ यूपी को विकास के रास्ते पर ले जाना है। बेशक वो हर हाल में अखिलेश, मायावती, मुलायम से बेहतर सीएम साबित हुये हैं। योगी किसी भी हाल में झुक नहीं सकते और न ही अपराधी, शत्रुओं को माफ करते हैं। आगे यूपी की जनता जानें...(लेखक पत्रकारिता विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची से जुड़े हैं।)

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