एबीएन डेस्क। झारखंड पुलिस के 2012 बैच के दारोगा लालजी यादव की मौत की जांच के मामले में सीआईडी ने प्राथमिक जांच पूरी कर ली है। सीआईडी की प्राथमिक जांच में आए तथ्यों के आधार पर पूरा मामला खुदकुशी का माना गया है। वहीं जांच में तीन वजहों से तनाव की बात सामने आयी है। पूरे मामले में सीआईडी के डीएसपी जेपीएन चौधरी के नेतृत्व में टीम ने जांच की है। जांच रिपोर्ट सोमवार को पुलिस मुख्यालय को सौंपी जाएगी।सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच में लालजी यादव के खुदकुशी के पीछे तीन मुख्य वजह सामने आए हैं। जांच में यह बात भी सामने आयी है कि लालजी यादव का सीधा विवाद डीटीओ से नहीं हुआ था, बल्कि थाने आए परिवहन विभाग के एक कर्मचारी से हुआ था, जो डीटीओ के अधीनस्थ था। वेतन नहीं मिलने की वजह से भी वे तनाव में थे। मौत की सीबीआई जांच के लिए याचिका दारोगा लालजी यादव की मौत की सीबीआई जांच के लिए झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है। रांची निवासी अनुरंजन अशोक ने याचिका दायर कर मौत को संदेहास्पद बताया है। इसकी सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया है। याचिका में सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर, उनके भाई वीनू ठाकुर, पलामू एसपी, डीटीओ और एसडीपीओ को भी प्रतिवादी बनाते हुए इनकी संपत्ति की जांच का आग्रह भी किया गया है। दी जा रही धमकी याचिका में कहा गया है कि लालजी यादव की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दाखिल करने वाले लालजी यादव के भाई और पलामू एसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने वाले उनके परिजनों को लगातार धमकी मिल रही है। साथ ही केस उठाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस पूरी घटना के पीछे कोयला और खनिज की लूट का विरोध प्रमुख वजह है। इससे पहले इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर लालजी यादव के भाई संजीव यादव ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। क्रिमिनल रिट में पलामू के एसपी, डीएसपी वर्तमान थाना प्रभारी डीटीओ और अन्य लोगों को पार्टी बनाया गया है। सीआईडी के अधिकारियों के मुताबिक, रांची के बुढ़मू थाने से मालखाना का चार्ज लंबित होने के कारण लालजी यादव को दो साल से अधिक वक्त से वेतन नहीं मिल रहा था। ऐसे में लालजी यादव वेतन को लेकर तनाव में थे। इसी दौरान पलामू डीटीओ की शिकायत पर थाने से निलंबित किए जाने के कारण लालजी यादव का तनाव बढ़ गया था। निलंबन के बाद लालजी यादव ने बूढ़मू थाने आकर मालखाने का प्रभार देने की कोशिश की थी, लेकिन इस दौरान भी कुछ सामान गायब मिले, ऐसे में लालजी यादव के वेतन निकासी का मामला फंस गया। सीआईडी के अधिकारियों के मुताबिक, पूरे मामले में विस्तृत जांच जरूरी है। परिवार के लोगों ने आला अधिकारियों पर भी प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, ऐसे में मोबाइल की सीडीआर समेत अन्य पहलुओं पर भी जांच होने के बाद मामला स्पष्ट हो पाएगा। गौरतलब है कि थाने से निलंबन के चार दिनों के बाद नावा बाजार के थानेदार रहे लालजी यादव ने थाने में ही खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में सीआईडी पुलिस मुख्यालय के आदेश पर केस का अनुसंधान टेकओवर करेगी।
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