टीम एबीएन, रांची। झारखंड में वनों और वन्य जीवों की कमी होने पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वन विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगायी। स्वत: संज्ञान लिए मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने अफसरों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अधिकारी कोर्ट में आते हैं और बड़े-बड़े दावे कर चले जाते हैं। यदि अधिकारी काम कर रहे हैं तो राज्य में वन और वनों में रहने वाले जंगली जानवर कहां चले जा रहे हैं। अधिकारियों के नए-नए पद सृजित हो रहे हैं और जानवर घटते जा रहे हैं। वर्ष 2018 में राज्य में पांच बाघ होने का दावा किया गया था, लेकिन अभी कितने बाघ हैं इसकी कोई जानकारी किसी को नहीं है। अदालत ने सरकार से मौखिक पूछा कि क्या वन विभाग के सर्वोच्च 20 अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है। क्यों नहीं इनकी संपत्ति की एसीबी से जांच करायी जाए। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में इसका उल्लेख नहीं किया। लातेहार में हाथियों की मौत पर स्वत: संज्ञान लेकर हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान हेड ऑफ फॉरेस्ट और अन्य अधिकारी अदालत में मौजूद थे।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse