जमशेदपुर। शुक्रवार का दिन जमशेदपुर के लिए एक चिंता की खबर लेकर आया। टाटा मेन हॉस्पिटल से भुवनेश्वर स्थित लैब में कोरोना संक्रमितों के 180 सैम्पल जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे उनमें 20 में कोविड ओमिक्रॉन के वैरियंट पाये गए हैं, जबकि शेष डेल्टा के सब वैरियंट पाये गए हैं। आज दोपहर जैसे ही भुवनेश्वर से जिनोम सिक्वेसिंग की रिपोर्ट जमशेदपुर पहुंची टाटा मेन हॉस्पिटल के विशेषज्ञ इसका विश्लेषण करने में जुट गए कि इसका जमशेदपुर में कोविड के प्रसार पर कितना सकारात्मक और कितना नकारात्मक असर होगा। टाटा स्टील के स्वास्थ्य सलाहकार डा राजन चौधरी ने यहां पत्रकारों को बताया, यह सही बात है कि आज जिनोम सिक्वेसिंग के लिए भुवनेश्वर भेजे गए लैब की पहली रिपोर्ट हमें मिल गयी है। ये सैंपल तीन जनवरी को लिए गए थे जबकि दिसंबर माह में भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी है। जिन संक्रमितों के सैंपल ओमिक्रोन वैरियंट के पाये गए हैं जिनकी ट्रेवल हिस्ट्री एवं उनके स्वास्थ्य पर पड़े असर का विश्लेषण किया जा रहा है। किन्तु हमारा मानना है कि ओमिक्रॉन वेरियंट बहुत खतरनाक तो नहीं है किन्तु यह गुणात्मक रुप से सक्रमण बढ़ाता है। ऐसा कहा जाता है कि शहर में बहुतों को इस वेरियंट ने प्रभावित किया होगा, और ऐसिम्टोमैटिक मरीजों को स्वत: ठीक करके चला भी गया होगा। ऐसे लोगों में इम्यूनिटी डेवलप हो गयी होगी। फिर भी हम आम लोगों को सलाह देंगे कि आप लोग घर से बाहर निकलते वक्त मास्क अवश्य पहने, सामाजिक दूरी का पालन करें और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। अन्यथा संक्रमण की दर फिर बढ़ सकती है। आपको बता दें कि टाटा मेन हॉस्पिटल जमशेदपुर का सबसे बड़ा अस्पताल है और यहां सबसे ज्यादा कोविड मरीज अब तक इलाज किए गए हैं। यहां से मिले आंकड़ों के विश्लेषण पूर्वी सिंहभूम में कोरोना संक्रमण की दर का इंडिकेटर माना जाताहै। यद्यपि टाटा मेन हास्पिटल के मेडिकल एडवाइजर डा़ राजन चौधरी ने बताया कि शहर में थर्ड वेव का असर लगातार कम होता जा रहा है। दो सप्ताह पहले कोविड- 19 से संक्रमित 221 मरीज भर्ती हुए थे जबकि पिछले सप्ताह यह घटकर 100 के लगभग हो गया है। केवल जमशेदपुर में ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड में भी कोविड 19 के मरीजों की संख्या घटती जा रही है। अब तक जो आंकड़े मिल रहे हैं उससे यहीं लगता है कि संक्रमण की स्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। आंकड़े एक-दो सप्ताह इसी तरह से रहे तो संक्रमण का स्तर इसी तरह से कम होता जाएगा। हम यह कह सकते हैं कि शहर में संक्रमण का स्तर अपने उच्चतम स्तर को पार कर अब ढ़लान की ओर है। डा़ चौधरी ने शहरवासियों को एक बार फिर चेतावनी दी है कि संक्रमण का स्तर कम होने का मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह से खत्म हो गया है। थर्ड वेव के वेरिएंट में कुछ ऐसे बदलाव हुए हैं जिसके कारण यह मानव शरीर को तेजी से संक्रमित करता है और इसका फैलाव भी तेजी से होता है। पहले व दूसरे वेब में भी आंकड़े कम होने के बाद लोगों ने एहतियात बरतना भूल गए थे जिसका नतीजा था कि संक्रमण फिर तेजी से बढ़ा और छोटे उम्र के युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।
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